अव्यय

अव्यय

‘सदृशं त्रिषु लिंगेषु सर्वासु च दिभक्तिषु, वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तद्व्ययम्’।

               जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक आदि के कारण कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता, उसे अव्यय कहते है। यथा-जब मैं जाऊँगा, तब वह आएगा। वह कहाँ गया है? राम और श्याम सहोदर भाई है। अभी मैं नहीं आ सकता।

               उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द रूप अव्यय हैं। इनका रूप नहीं बदलता। ये सभी अविकारी शब्द हैं। इनमें कोई रूपान्तर नहीं होता है। इसलिए उन्हें अविकृत, अविकारी या अपरिवर्तनशील कहते है।

               अव्यय किसी अन्य शब्द के साथ ल गकर उसे भी अव्यय बना देते हैं। जैसे-प्रतिदिन, यथाशक्ति, भरपेट।

अव्यय के चार भेद होते है-

1. क्रियाविशेषण        2. सम्बन्ध बोधक 

3. समुच्चयबोधक      4. विस्मयादिबोधक।
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