क्रिया- जिन शब्दों से काम का करना या होना पाया जाये, उन्हें क्रिया कहते है।
क्रिया तीन प्रकार के शब्दों से बनती है-
1. धातु से पढ़ना = पढ़+ ना
2. संज्ञा से हथियाना = हाथ+आ+ना, शरमाना, फिल्माना
3. विशेषता से चिकनाना = चिकना+आ+ना, सठियाना
रचना की दृष्टि से क्रिया भेद:-
1. रूढ़ (मूल) क्रिया : धातु से बनी क्रियाएँ। खाना, खाया, खाऊँ, खाएँ, खाएगा-‘खा’
2. यौगिक क्रिया: जो एकाधिक तत्वों से बनती है।
खाना ः खिलाना देख ः दिखाना
पीना ः पिलाना पढ़ना ः पढ़वाना आदि
यौगिक क्रियाओं के चार उपभेद हैं-
1. प्रेरणार्थक क्रियाएँ 2. संयुक्त क्रियाएँ
3. अनुकरणात्मक क्रियाएँ 4. नाम धातु क्रियाएँ
1. प्रेरणार्थक क्रियाएँ: जब कर्ता किसी कार्य को स्वयं न करके किसी दूसरे को कार्य करने की प्रेरणा दे तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
उदा0- गोविन्द ने मिनहाज को जगाया। (मिनहाज गोविन्द की प्रेरणा से जगा)। राम नौकर से काम कराता है। मैं माली से बाग सिंचवाता हूँ।
2. संयुक्त क्रियाएँ: जो क्रिया किसी क्रिया अथवा संज्ञादि शब्द के साथ दूसरी क्रिया का योग करने से बनती है उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। जैसे-कर चुका, लिख बैठा, चल पड़ा, चिल्ला उठा।
अर्थ की दृष्टि से संयुक्त क्रियाओं के 13 भेद किये जाते है-
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1.
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आरम्भबोधक
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धातु+ने+लगना
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वह पढ़ने लगा।, पानी बरसने लगा ।
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2.
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समाप्तिबोधक
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धातु+चुकना
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वह पढ़ चुका। वह खा चुका।
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3.
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आकस्मिकता बोधक
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धातु+उठना, बैठना, पड़ना
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वह कह उठा। वह रो पड़ा।
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4.
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निरन्तरता बोधक
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जाना, रहने के पहले कृदन्त रूप
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बरसता रहा। चलता गया। बोलती गयी।
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5.
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अभ्यास बोधक
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भूतकृदन्त+करना
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पढ़ा करता है। लिखा करता था।
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6.
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शक्यता बोधक
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धातु+सकना
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जा सकते हो। वह कठिन वाक्य भी पढ़ सकता है।
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7.
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अवकाशबोधक
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धातु+ने+पाना
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वह पढ़ने न पाया। जाने न पाया। खेलने न पायी।
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8.
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अनिष्टताबोधक
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धातु+खाना+मारना
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कुत्ते ने काट खाया। चिट्ठी लिख मारी।
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9.
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इच्छा बोधक
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धातु+ना+चाहना
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वह जाना चाहता है। क्या आप खाना खायेगी?
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10.
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अनुमति बोधक
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धातु+ने+देना
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उसे पढ़ने दो। मुझे जाने दीजिए। उसे करने दिया गया।
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11.
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आवश्यकताबोधक
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धातु+ना, रूप+पढ़ना, चाहिये, होना ।
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करना पड़ेगा। जाना चाहिये। लेना चाहिये
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12.
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अतिशयताबोधक
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क्रिया की दुरूक्ति
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वह पढ़ते-पढ़ते सो गया। मैं बैठे-बैठे थक गया। सुन-सुनकर
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13.
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संजादि के साथ संयुक्त क्रिया से संज्ञादि का अर्थ प्रधान रहता है।-अपना बनाना, आदर देना, ढीला पड़ना।
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3. अनुकरणात्मक क्रियायें-किसी वास्तविक या कल्पित ध्वनि के अनुकरण में हम क्रियाएँ बना लेते हैं। खटखट से खटखटाना। थरथर से थरथराना।
4. नामधातु क्रियाएँ: जो धातु संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनती है, उसे नाम धातु कहते हैं। जैसे-बात से बतियाना, अपना से अपनाना, झूठ से झूठलाना, दुःख से दुःखाना, लाज से लजाना, रंग से रंगना, धिक्कार से धिक्कारना, आधा से अधियाना।