क्रिया-विशेषण
जिस अव्यय से क्रिया, विशेषण या अन्य क्रियाविशेषण की विशेषता प्रकट हो उसे ‘क्रियाविशेषण अव्यय’ कहते है। यथा-विभव धीरे-धीरे पढ़ता है। उसके पास स्तरीय पुस्तकें पर्याप्त है। वह कल अवश्य आएगा।
क्रियाविशेषण के भेद-
1. रूप के आधार पर-
(क) मूल क्रियाविशेषण (ख) यौगिक क्रियाविशेषण
(ग) कारण क्रियाविशेषण।
(क) मूल क्रियाविशेषण-जो क्रियाविशेषण किसी अन्य शब्द के योग या मेल से नहीं बनते, ‘मूल क्रिया विशेषण’ कहलाते है। यथा- अचानक, फिर, पुनः, ठीक, नहीं।
(ख) यौगिक क्रियाविशेषण-जो क्रियाविशेषण प्रत्यय या अन्य शब्द के योग से बनते है ‘यौगिक क्रियाविशेषण’ कहलाते है। यथा-प्रतिदिन, हरेक, यथाक्रम, घर-बाहर, जहाँ-तहाँ, बाहर-भीतर।
(ग) कारण क्रियाविशेषण-जो शब्द किसी विशेष कारण या उद्देश्य से क्रियाविशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें ‘करण क्रियाविशेषण’ कहते है। उदा0-वह खाक पढ़ेगा।
जाओगे नहीं तो सिर चाटोगे।
2. प्रयोग के आधार पर-
(क) साधारण क्रियाविशेषण (ख) अनुबद्ध क्रियाविशेषण
(ग) संयोजक क्रियाविशेषण।
(क) साधारण क्रियाविशेषण-जिन क्रियाविशेषण का प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जाए। उदाहरण-आह! मैं क्या करूँ।
(ख) अनुबद्ध क्रियाविशेषण- जिन क्रियाविशेषण का प्रयोग अवधारणा (निश्चय) के लिए किसी शब्द के साथ होता है, उन्हें अनुबद्ध क्रियाविशेषण कहते है। उदा0- यह तो बड़ी विचित्र बात है। मैंने उन्हें देखा तक नहीं।
(ग) संयोजक क्रियाविशेषण- जिन क्रियाविशेषण का सम्बन्ध किसी अन्य कथन के संयोजन के लिए होता है। उदा0-जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि।