भारत के प्रमुख सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों का उल्लेख कीजिए। इन सूचना प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने देश के आर्थिक विकास में किस प्रकार की भूमिका अदा की है? साथ ही बताइए कि सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्र से संबंधित कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ हैं, जिनका समाधन आवश्यक है?

 भारत में सूचना-प्रौद्योगिकी का विकास नब्बे के दशक में प्रारंभ हुआ तथा वर्तमान समय में भारत सूचना-प्रौद्योगिकी के मामले में विश्व का अग्रणी देश माना जाता है। भारत में बेंगलुरू, पुणे, चेन्नई आदि को सूचना-प्रौद्योगिकी के प्रमुख केन्द्र का दर्जा प्रदान किया जाता है।

बेंगलुरू को भारत में प्रमुख सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्र का दर्जा दिया जाता है। इसका कारण यह है कि बेंगलुरू की जलवायु काफी सुहावनी है तथा यहाँ अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभा भी उपलब्ध है। ज्ञातव्य है कि भारत का प्रथम सूचना-प्रौद्योगिकी पार्क बेंगलुरू में ही स्थापित किया गया।

इसी प्रकार पुणे भी सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्र के रूप में जाना जाता है। यहाँ की जलवायु तो बेहतर है ही, साथ ही यहाँ के स्थानीय लोग काफी प्रगतिशील सोच वाले हैं। सबसे बढ़कर पुणे में कईं तकनीकी शैक्षणिक संस्थान हैं जो बहुराष्ट्रीय सूचना-प्रौद्योगिकी कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

बेंगलुरू एवं पुणे के समान चेन्नई भी भारत का प्रमुख सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्र है। सॉफ्टवेयर निर्यात के मामले में बेंगलुरू के पश्चात् चेन्नई का ही स्थान आता है। आँकड़ों के अनुसार, अकेले चेन्नई के द्वारा ही भारत के कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में 15 प्रतिशत का योगदान किया जाता है।

देश  के आर्थिक  विकास  में  इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों की भूमिका

  • देश के आर्थिक विकास में इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने ‘विकास इंजिन’ की भूमिका अदा की है। इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों के कारण ही भारत को विश्व में सॉफ्टवेयर के मामले में उच्च स्थान प्रदान किया जाता है।
  • वर्तमान में भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियाँ अमेरिका एवं यूरोप के साथ-साथ अन्य देशों में भी स्वयं को मजबूती से स्थापित कर चुकी है।
  • इन कंपनियों के द्वारा सॉफ्टवेयर  के निर्यात से भारी मात्रा में राजस्व का अर्जन किया जाता है जो देश के विकास को भी गति प्रदान करता है।
  • सबसे बढ़कर इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने वैश्विक बहुराष्ट्रीय सूचना-प्रौद्योगिकी कंपनियों को आकर्षित कर ‘मेक-इन-इण्डिया’ को बढ़ावा दिया है।
  • इसके अतिरिक्त इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने देश के लाखों युवा इंजीनियरों को रोजगार प्रदान कर आर्थिक विकास में अहम योगदान दिया है।

सूचना प्रौद्योगिकी केन्द्रों से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ

  • इस सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने लाखों की संख्या में लोगों को आकर्षित किया है। साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी इन केन्द्रों को अपना महत्वपूर्ण ठिकाना मानती है। इसके कारण इन केन्द्रों की आबादी काफी तेजी से बढ़ रही है जिससे यातायात एवं अन्य आधारभूत  सुविधओं की कमी संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही है।
  • पुणे की सबसे बड़ी समस्या अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का न होना है जिसके कारण ‘सूचना-प्रौद्योगिकी हब’ के रूप में इसका आगे का विकास अवरूद्ध हो रहा है।
  • वर्तमान में साइबर अपराधों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों में कई ऐसे शातिर दिमाग वाले लोग भी मौजूद हो सकते हैं जो देश की सुरक्षा को गंभीर हानि पहुँचा सकते हैं।
  • आईएसआईएस नामक आतंकी संगठन के लिए मेंहदी मसरूर नामक युवा इंजीनियर बेंगलुरू से ही ‘शमी विटनेस’ नाम से ट्विटर अकाउंट संचालित करता था।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत के प्रमुख सूचना-प्रौद्योगिकी केन्द्रों ने देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका अदा की है। किन्तु इन केन्द्रों से संबंधित कईं महत्वपूर्ण चुनौतियाँ भी है जिनका निराकरण आवश्यक है।

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