नदियों को भारत की जीवन-रेखा का दर्जा दिया जाता है किन्तु इन नदियों के कारण देश को प्रतिवर्ष बाढ़ की आपदा का भी सामना करना पड़ता है, स्पष्ट कीजिए। क्या बाढ़ की आपदा को ?प्राकृतिक आपदा? का दर्जा देना उचित होगा, आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए? बाढ़ की समस्या के निदान के लिए आप कौन-कौन से उपाय प्रस्तुत करेंगे?

भारत को नदियों का देश कहा जाता है क्योंकि उत्तर से लेकर दक्षिण एवं पूर्व से लेकर पश्चिम तक विशाल नदियों का जाल बिछा हुआ है। ये नदियाँ एक ओर जहाँ भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए जीवन-रेखा का काम करती है वहीं दूसरी ओर इन नदियों के कारण देश को विशेषकर उत्तरी एवं पूर्वी हिस्से को प्रतिवर्ष भीषण बाढ़ का भी सामना करना पड़ता है। नदियों के कारण उत्पन्न बाढ़ की इस समस्या के कारण महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि क्या बाढ़ को ‘प्राकृतिक आपदा’ का दर्जा दिया जाना चाहिए?

बाढ़ को प्राकृतिक आपदा का दर्जा प्रदान करने के पक्ष में तर्क

  • बाढ़ के कारण देश को प्रतिवर्ष जान एवं माल का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका सर्वाधिक नुकसान गरीबों को उठाना पड़ता है।
  • बाढ़ से घरों, इमारतों तथा खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचता है। सबसे बढ़कर बाढ़ के कारण भारी संख्या में पशुओं को असमय काल का ग्रास बनना पड़ता है।
  • बाढ़ के कारण कईं प्रकार की जलजनित बीमारियाँ (Waterborn disesase) उत्पन्न होती है जिनसे निपटने में भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं जिससे लोगों के समक्ष रोजगार की समस्या उत्पन्न होती है।
  • बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के पुनर्वास में भीषण समस्या के साथ-साथ वित्तीय खर्च के बोझ का भी सामना करना पड़ता है।

बाढ़ को प्राकृतिक आपदा का दर्जा प्रदान करने के विपक्ष में तर्क

  • बाढ़ को प्राकृतिक आपदा नहीं घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि इससे एक ओर जहाँ खेतों को नयी उपजाऊ मिट्टी प्राप्त होती है वहीं दूसरी ओर जल स्त्रोतों का पुनर्भरण भी होता है।
  • बाढ़ से जल की जैव-विविधता समृद्ध होती है क्योंकि बाढ़ के कारण जलीय स्त्रोतों को पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।

बाढ़ की समस्या के प्रभावी निराकरण के लिए सुझाव

  • बाढ़ की समस्या के निराकरण के लिए नदियों के किनारे मजबूत तटबंधें का निर्माण किया जाना चाहिए तथा नदियों के किनारे से एक निश्चित दूरी तक निर्माण संबंधी गतिविधियों पर रोक लगायी जानी चाहिए।
  • नदियों के किनारे बसे लोगों का अन्य सुरक्षित स्थानों में पुनर्वास किया जाना चाहिए तथा समुचित वित्तीय मदद उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • बाढ़ की समस्या की पूर्व चेतावनी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी मसलन उपग्रहों एवं राडार आदि का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • शहरी क्षेत्रों में उपयुक्त जल निकास प्रणाली को स्थापित किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बाढ़ की समस्या निश्चित तौर पर एक गंभीर समस्या है किन्तु इसे प्राकृतिक आपदा घोषित करने से पूर्व एक विशेषज्ञ दल गठित किये जाने की जरूरत है ताकि इस समस्या के सभी पक्षों का गहन विश्लेषण किया जा सके।

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