वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि दुग्ध में दो प्रकार के बीटा केसीन ए-1 तथा ए-2 पाये जाते हैं। ए-1 तथा ए-2 दुग्ध के बीच प्रमुख अंतर क्या है, स्पष्ट कीजिए? साथ ही बताइए कि ए-1 तथा ए-2 दुग्ध के बीच विवाद क्यों गंभीर स्वरूप धरण करता जा रहा है?

दुग्ध में दो प्रकार के बीटा केसीन ए-1 तथा ए-2 पाये जाते हैं। हालाँकि डेयरी गायों में अभी तक 15 प्रकार के बीटा केसीन की खोज हुयी है किंतु इनमें से ए-1 तथा ए-2 बीटा केसीन ही प्रमुख है। दुग्ध में पाये जाने वाले कुल प्रोटीन में से एक-तिहाई हिस्सा बीटा केसीन का होता है। बीटा केसीन एक उच्च कोटि का प्रोटीन है जो न केवल अमीनों अम्लों की आपूर्ति करता है बल्कि यह पशुओं के लिए कैल्शियम अवशोषण में भी सहायक होता है।

ए-1 तथा ए-2 दुग्ध के बीच प्रमुख अंतर क्या है?

  • प्रोटीन के निर्माण के लिए अमीनों अम्लों की एक लम्बी  श्रृंखला की जरूरत होती है। बीटा केसीन नामक प्रोटीन की  श्रृंखला 229 अमीनों अम्लों से बनती है। जिन गायों में ए-2 बीटा केसीन के जीन पाये जाते हैं उनमें केसीन प्रोटीन  श्रृंखला का 67 वाँ अमीनों अम्ल ‘प्रोलीन’ होता है।
  • जबकि ए-1 बीटा केसीन नामक प्रोटीन उत्पन्न करने वाली गायों में 67 वें अमीनो अम्ल प्रोटीन के स्थान पर ‘हिस्टीडीन’ नामक अमीनो अम्ल होता है।
  • ए-1 एवं ए-2 बीटा केसीन नामक प्रोटीन की  श्रृंखला में यह परिवर्तन आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व हुए एक आनुवांशिक परिवर्तन के कारण सम्भव हुआ था।
  • ए-2 बीटा केसीन वाली गायों में प्रोलीन तथा बीसीएम-7 नामक प्रोटीन के बीच मजबूत बाँड होता है जिससे बीसीएम-7 प्रोटीन पशु की भोजन नली, मूत्रा या रक्त तक नहीं पहुंच जाता है।
  • जबकि हिस्टीडीन तथा बीसीएम-7 के मध्य एक कमजोर बाँड होता है तथा यह ए-1 बीटा केसीन युक्त दुग्ध पीने वाले पशुओं एवं मनुष्यों की भेाजन नली में आसानी से पहुंच जाता है।

ए-1 तथा ए-2 दुग्ध् के बीच उत्पन्न विवाद के प्रमुख कारण

  • ए-1 तथा ए-2 दुग्ध के बीच सर्वप्रथम उस समय विवाद सामने आया जब वर्ष 1993 में ऑकलैण्ड विश्वविद्यालय के बॉब इलियट ने बताया कि ए-1 दुग्ध के सेवन से बच्चों को टाइप-1 का मधुमेह रोग हो सकता है।
  • इसी प्रकार अन्य शोधों से ज्ञात हुआ है कि स्नायु तंत्रा से सम्बंधित रोगों के साथ-साथ ए-1 बीटा केसीन युक्त दुग्ध् मधुमेह एवं हृदय रोग के लिए भी उत्तरदायी है।
  • ए-1 दुग्ध के हानिकारक होने का प्रमुख कारण यह है कि कि बीसीएम-7 या केसोमापिर्फन-7 नामक प्रोटीन इसमें उपस्थित होता है।
  • प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है बीसीएम-7 या केसोमापिर्फन-7 नामक प्रोटीन ए-1 दुग्ध से ही बन सकता है।
  • बोस्टन के एक विश्वविद्यालय ने अपने शोध में पाया है कि पाचन नली की कोशिकाओं में बीसीएम-7 की अधिक मात्रा होने से स्नायु कोशिकाओं में एंटी ऑक्सीडेंट की कमी हो जाती है जिससे ऑटिज्म जैसे विकार उत्पन्न होते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ए-1 बीटा केसीन युक्त दुग्ध मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तथा ए-2 बीटा केसीन युक्त दुग्ध मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। दोनों के बीच विवाद का प्रमुख कारण इसी तथ्य में निहित है।
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