शेल कम्पनियाँ ऐसी कम्पनियाँ होती है जो न तो व्यापार में सक्रिय रूप से भागीदारी करती है और न ही इनकी कोई वास्तविक सम्पत्ति होती है। वस्तुतः शेल कम्पनियों का निर्माण केवल कागजों पर ही किया जाता है। सबसे बढ़कर शेल कम्पनियों के द्वारा आधिकारिक रूप से कोई कारोबार भी नहीं किया जाता हैं।
दरअसल शेल कम्पनियों का प्रयोग काले धन का निवेश कर उसे सफेद बनाने में किया जाता है। ऐसा माना जाता है शेल कम्पनियों का प्रयोग देश विरोधी तत्वों की फंडिंग में भी किया जाता है। हाल ही में केन्द्र सरकार के द्वारा दो लाख से अधिक शेल कम्पनियों के विरूद्ध कार्यवाही प्रारंम्भ की गयी है।
शेल कम्पनियों को नियंत्रित करने के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा उठाये गये कदम
- शेल कम्पनियों को नियंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में एक विशेष टास्क पफोर्स का गठन किया गया है।
- इस टास्क फोर्स के द्वारा शेल कम्पनियों के सम्बंध में आकड़े जुटाने के लिए डाटाबेस तैयार किया जा रहा है।
- शेल कम्पनियों के लिए एक निश्चित फॉर्मेट बनाया गया है ताकि इस फॉर्मेट के तहत आने वाली कम्पनियों को शेल कम्पनियों की श्रेणी में शामिल किया जा सके।
- अब प्रत्येक कम्पनी के डायरेक्टर को अपना आधार कार्ड जमा करना होगा। जिससे आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस कम्पनी का गठन किसके द्वारा किया गया है।
- सबसे बढ़कर 10 से अधिक ऐसी सूचनाओं को कंपनी के गठन के समय देना जरूरी होगा जिनसे शेल कम्पनियों के विषय में आसानी से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
शेल कम्पनियों को देशविरोधी एवं अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक मानने के प्रमुख कारण
- शेल कम्पनियों को देश विरोधी इसलिए माना जाता है क्योंकि इनके माध्यम से आतंक का वित्तपोषण किया जाता है।
- इसी प्रकार ऐसे आरोप सामने आये हैं कि मादक पदर्थों एवं अवैध हथियारों के तस्कारों के वित्तपोषण के लिए भी शेल कम्पनियों का संचालन किया जा रहा है।
- शेल कम्पनियों को अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए हानिकारक माना जाता है क्योंकि इनके माध्यम से काले-धन को सफेद धन में परिवर्तित किया जाता है।
- इसी प्रकार शेल कम्पनियों का प्रयोग हवाला के माध्यम से धन के लेन-देन के लिए भी किया जाता है।
निष्कर्षः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि शेल कम्पनियों के विरूद्ध सरकार के द्वारा उठाया गया कदम उचित है। शेल कम्पनियाँ देश विरोधी होने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए भी हानिकारक हैं।