पेटेंट, कॉपीराइट एवं ट्रेडमार्क के मध्य प्रमुख अंतर क्या है, स्पष्ट कीजिए? बौद्धिक सम्पदा के मामले में भारत की वैश्विक स्थिति का सविस्तार उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि भारत के द्वारा वर्ष 2016 में जारी की गई राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति में कौन से प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं? उ

जब कोई व्यक्ति किसी आविष्कार, उत्पाद या नवीन प्रक्रिया को जन्म देता है तो इसकी सुरक्षा के लिए पेटेंट प्रदान किया जाता है। पेटेंट आगामी 20 वर्षों की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है।

भारत में कॉपीराइट अधिकार का विनियमन कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के अन्तर्गत किया जाता है। कॉपीराइट किसी रचनाकार को उसके साहित्यिक एवं कलात्मक कार्यों के लिए प्रदान किया जाता है। जिस रचना के लिए रचनाकार को कॉपीराइट प्रदान किया जाता है उस रचना के पुनः उत्पादन अथवा प्रतिकृति निर्माण को रचनाकार की अनुमति के बगैर नहीं किया जा सकता है। जबकि ट्रेडमार्क, पेटेंट एवं कॉपीराइट से अलग होता है।

ट्रेडमार्क के द्वारा एक उद्यम की वस्तुओं एवं सेवाओं तथा अन्य उद्यम की वस्तुओं एवं सेवाओं के बीच अंतर स्पष्ट किया जाता है। भारत में ट्रेडमार्क, ट्रेडमार्क अधिनियम 1999 द्वारा विनियमित किया जाता है।

बौद्धिक सम्पदा के मामले में भारत की वैश्विक स्थिति

  • बौद्धिक सम्पदा के मामले में भारत की स्थिति काफी कमजोर है। वर्ष 2017 में यूनाइटेड स्टेट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स के द्वारा जारी किए गए बौद्धिक सम्पदा सूचकांक में भारत को 45 देशों में से 43वाँ स्थान प्रदान किया गया है।
  • ब्रिक्स (BRICS) समूह के अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति सबसे निम्न रही है।
  • उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स देशों में ब्राजील को  32वाँ, रूस को 23वाँ, चीन को 27वाँ तथा दक्षिण अफ्रीका को 33वाँ स्थान प्रदान किया गया है।

राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा नीति, 2016 के तहत निर्धारित प्रमुख लक्ष्य

देश में बौद्धिक सम्पदा अधिकार को अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप बनाने तथा नवाचार एवं नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा नीति, 2016 को जारी किया गया जिसके तहत निम्न लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं-

  • समाज के समस्त वर्गों को जागरूक बनाना ताकि वे बौद्धिक सम्पदा अधिकार के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक लाभ को समझ सकें।
  • बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के वाणिज्यिक महत्व को बढ़ावा देना तथा इनके सृजन को प्रोत्साहित करना।
  • बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं व्यापक जनहित से सम्बंधित मामलों के मध्य सामंजस्य एवं संतुलन स्थापित करना।
  • न्यायिक तंत्र एवं प्रवर्तन प्रणाली को सशक्त बनाना ताकि बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के उल्लंघन सम्बंधी मामलों का समुचित निराकरण किया जा सके।
  • प्रशासन का आधुनिकीकरण करना ताकि एक सेवा आधरित बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्रशासन को सशक्त बनाया जा सके।
  • शिक्षण, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान को बढ़ावा देना ताकि बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के सम्बंध में एक नवीन भारत का निर्माण किया जा सके।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार के मामले में भारत की स्थिति काफी कमजोर है। राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति, 2016 के लक्ष्यों पर समुचित ढंग  से अमल करके इस स्थिति में परिवर्तन लाया जा सकता है।

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