हाल ही में सूरत-घोघा जलमार्ग पर ?रो-रो फेरी सेवा? की शुरूआत की गई है। ?रो-रो फेरी सेवा? के संबंध में आप क्या जानते हैं, विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए? साथ ही बताइए कि इस सेवा की शुरूआत से किस प्रकार के लाभ सामने आयेंगे?

 हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा सूरत-घोघा जलमार्ग पर ‘रो-रो फेरी सेवा’ (Roll on-Roll off Ferry Service) की शुरूआत की गयी है। इस सेवा के अंतर्गत भरूच के दाहेज को भावनगर के घोघा से जोड़ा जायेगा। इस सेवा की कुल लागत 614 करोड़ रूपये अनुमानित की गयी है।

रो-रो पेफरी सेवा के संबंध में आप क्या जानते हैं?

  • रो-रो फेरी सेवा से तात्पर्य ऐसी सेवा से है जिसके तहत दो बंदरगाहों के बीच यात्रियों एवं हल्के तथा भारी वाहनों को सुविधापूर्वक ले जाया जाता है।
  • इस सेवा के तहत वाहनों को चलाकर चढ़ाया जाता है। इसके लिए बंदरगाहों में रैम्प बनाये जाते हैं। जबकि पहले इन वाहनों को क्रेन की मदद से उठाकर जहाज पर चढ़ाया जाता था।
  • ज्ञातव्य है कि पुरानी सेवा को लो-लो सेवा (Lift on Lift off Service) भी कहा जाता है जिसमें वाहनों को क्रेन से उठाकर जहाजों पर चढ़ाया एवं उतारा जाता है।
  • भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा अभी केवल इस सेवा के प्रथम चरण की शुरूआत की गयी है जिसके तहत केवल यात्री सेवा ही प्रदान की जायेगी। बाद के चरणो में वाहनों को चढ़ाने एवं उतारने जैसी सेवायें भी प्रदान की जा सकेंगी।

रो-रो फेरी सेवा की शुरूआत से होने वाले प्रमुख लाभ

  • रो-रो फेरी सेवा भारत की ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया की भी प्रथम सेवा है। इससे यात्रा के समय एवं धन दोनों की बचत होगी।
  • वर्तमान में यदि भरूच के दाहेज से भावनगर के घोघा तक सड़क मार्ग से यात्रा की जाती है तो कुल 360 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है जबकि रो-रो फेरी सेवा के शुरू होने से अब यह दूरी 360 किलोमीटर से घटकर मात्रा 35 किलोमीटर रह गयी है।
  • सड़क मार्ग से 360 किलोमीटर की दूरी तय करने में आठ घण्टे का समय लगता था किंतु रो-रो फेरी सेवा के माध्यम से कुल 1 घण्टे में यह सफर पूरा हो जायेगा।
  • प्रतिदिन सौराष्ट्र के कारीगर हीरा काटने, तराशने आदि के लिए दक्षिण गुजरात के सूरत में जाते हैं। ये कारीगर सड़क मार्ग से ही यात्रा करते हैं जिसमें उन्हें आठ घण्टे का समय लगता है। अब ये कारीगर जलमार्ग से यात्रा कर सकेंगे जिससे उनका सात घण्टे का समय बच जायेगा।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि रो-रो फेरी सेवा देश की आधारभूत संरचना को सशक्त बनाने की दिशा में की गयी महत्वपूर्ण पहल है। इससे बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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