सार्वजनिक निधियों के प्रयोग के लिए सिर्फ इतना ही महत्वपूर्ण नहीं है कि उनका आवंटन कर दिया जाये बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उनका समुचित उपयोग भी सुनिश्चित किया जाये, स्पष्ट कीजिये? सार्वजनिक निधियों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके, इसके लिए आप कौन से उपाय प्रस्तुत करेंगे?

कार्यपालिका अर्थात सरकार के द्वारा अपनी नीतियों के क्रियान्वयन एवं कानून-व्यवस्था आदि को बनाये रखने के लिए सार्वजनिक निधि का प्रयोग किया जाता है किंतु सार्वजनिक निधियों  का अधिकांश मामलों में दुरुपयोग किया जा जाता है। यही कारण है कि सिर्फ सार्वजनिक निधियों  का आवंटन ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इनका प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

सार्वजनिक निधियों  का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना क्यों जरूरी है?

  • सार्वजनिक निधियों  का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जब सार्वजनिक निधियों  का प्रयोग राजनीतिक प्रचार तथा स्वयं की पार्टी के एजेण्डे के प्रसार में किया गया।
  • अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान ऐसे मामले सामने आये कि सार्वजनिक निधि का गलत उपयोग किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर मनरेगा एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सार्वजनिक निधियों  के व्यापक दुरुपयोग की जानकारी प्राप्त हुयी।
  • भ्रष्टाचार के कारण सम्बंधित योजना के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग होता है जिससे योजना के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करने में समस्या आती है। यही कारण है कि सार्वजनिक निधियों  का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

सार्वजनिक निधियों के सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय

  • सार्वजनिक निधियों  के संदर्भ में पारदर्शिता का होना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए ई-गवर्नेंस को अपनाया जाना चाहिए।
  • सोशल ऑडिट (Social Audit) को व्यापक तौर पर लागू किये जाने तथा इसके प्रति लोगों को जागरुक बनाये जाने की आवश्यकता है।
  • अधिकारियों को इस ढंग से प्रशिक्षित किये जाने की आवश्यकता है ताकि वे सार्वजनिक निधि के व्यय की प्रासंगिकता एवं महत्व को भलीभांति समझ सकें।
  • साथ ही अधिकारियों को समुचित नैतिक प्रशिक्षण भी प्रदान किये जाने की जरूरत है ताकि भ्रष्टाचार के प्रति उनके मन में जीरो टॉलरेंस (Zero tolerance) की भावना हो।
  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के द्वारा ऑडिट (Audit) जैसी परम्परागत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किये जाने की जरूरत है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सार्वजनिक निधियों  का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाना अति आवश्यक है क्योंकि देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में सार्वजनिक निधि का अहम योगदान होता है।

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