अनुनयन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना के प्रति किसी अन्य व्यक्ति या समूह के दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता है। उदाहरण के तौर पर टी.वी. आदि के विज्ञापनों का उद्देश्य अनुनयन के माध्यम से लोगों को किसी सामान विशेष की ओर आकर्षित करना होता है ताकि लोग उस सामान को ही वरीयता प्रदान करें। इसी प्रकार जब कोई राजनेता या धर्मिक नेता लोगों से अपील कर उनकी राय निर्मित करता है तो वह भी अनुनयन का ही सहारा लेता है।
अनुनयन के संदर्भ मे अरस्तू का मत
- अरस्तू के अनुसार अनुनयन मानवीय व्यवहार से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसका प्रयोग दैनिक जीवन में लोगों की राय एवं मत के निर्माण के लिए किया जाता है।
- अरस्तू अनुनयन के लिए वक्ता अर्थात् बोलने वाले की विश्वसनीयता एवं तार्किक प्रस्तुतीकरण को महत्वपूर्ण मानता है।
- सबसे बढ़कर अरस्तू बोलने वाले की विश्वसनीयता एवं तार्किक प्रस्तुतीकरण के साथ-साथ श्रोताओं से भावनात्मक सम्पर्क को भी अनुनयन के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
अरस्तू अनुनयन के लिए इथोस (Ethos), लोगोस (Logos) एवं पैथोस (Pathos) को क्यों महत्वपूर्ण मानता है?
- इथोस (Ethos) से तात्पर्य बोलने वाले अर्थात् वक्ता की विश्वसनीयता से होता है। वक्ता की विश्वसनीयता तभी स्थापित हो सकती है जब श्रोताओं को वक्ता में कुछ ऐसे गुण मिलते हैं जिन पर स्वयं उनका दृढ़ विश्वास होता है।
- उदाहरण के तौर पर यदि श्रोताओं की आस्था सत्य, अहिंसा, साहस एवं अनुशासन जैसे मूल्यों के प्रति है और उन्हें प्रतीत होता है कि वक्ता में भी ऐसे ही गुण हैं तो वे वक्ता को विश्वसनीय मानते हैं तथा उसके कथनों का पालन करते हैं।
- इसी प्रकार अरस्तू लोगोस (Logos) अर्थात् तार्किक प्रस्तुतीकरण को भी अनुनयन के लिए अहम मानता है।
- लोगोस (Logos) के तहत वक्ता तर्क एवं आकड़ों से अपनी बात की पुष्टि करता है जिसका सीधा प्रभाव श्रोतागणों पर पड़ता है।
- सबसे बढ़कर अरस्तू पैथोस (Pathos) अर्थात् श्रोताओं से भावनात्मक सम्पर्क को भी अनुनयन के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
- पैथोस के तहत वक्ता सार्थक भाषा का प्रयोग करता है तथा भावुक स्वर एवं भावनात्मक अपील आदि के माध्यम से श्रोताओं से भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास करता है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अनुनयन मानवीय व्यवहार से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। अनुनयन के लिए इथोस (Ethos) लोगोस (Logos) की तरह पैथोस (Pathos) की भी अहम भूमिका होती है।