(क) इस मामले में दो अलग-अलग वर्गों के हित आपस में टकरा रहे हैं। एक वर्ग विभिन्न धर्मिक समुदायों का है और दूसरा वर्ग विद्यार्थियों का है।
- विभिन्न धर्मिक समुदाय, जहाँ एक ओर धर्मिक स्वतंत्राता का अधिकार चाहते हैं ताकि वे अबाध रूप से पूरी स्वतंत्राता के साथ अपने धर्म का प्रचार-प्रसार कर सके।
- वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों का समूह अध्ययन के लिए शांतिपूर्ण माहौल चाहता है जो कि उनके गरिमापूर्ण जीवन जीने के संवैधनिक अधिकार (अनुच्छेद-21) से संबंधित है।
(ख) एक जिलाधिकारी के रूप में मेरा यह दायित्व बनता है कि दोनों वर्गों के हितों के बीच पारस्परिक सौहार्द्र एवं सामंजस्य से संतुलन स्थापित किया जाए तथा शांति एवं व्यवस्था को कायम रखा जाए।
- यद्यपि मेरे लिए धर्मिक स्वतंत्राता का अधिकार एवं विद्यार्थियों का गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दोनों महत्व रखते हैं किन्तु मैं विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण माहौल में अध्ययन करने के अधिकार को प्राथमिकता दूँगा।
- इस समस्या के समाधन के लिए सर्वप्रथम मैं विभिन्न धर्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों से बात करूँगा तथा समाधान निकालने का प्रयास करूँगा किन्तु यदि धार्मिक समुदाय मेरे तर्कों से सहमत नहीं होते तो मेरे द्वारा कानून सम्मत कार्यवाही की जायेगी।
मेरे द्वारा उठाया गया बातचीत का कदम
- मेरे द्वारा संबंधित सभी धर्मिक समुदायों के प्रमुख प्रतिनिधियों की एक मीटिंग बुलाई जाएगी। इस मीटिंग में मैं सभी को समझाने का प्रयास करूँगा कि इससे (लाउड-स्पीकर) आदि से सभी वर्ग के विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं जिनमें आपके वर्ग के विद्यार्थी भी शामिल है। साथ ही वृद्ध एवं बीमार भी प्रभावित होते हैं।
- मेरे द्वारा सभी प्रतिनिधियों को यह विश्वास दिलाया जायेगा कि यह कदम समाज के हित में है तथा प्रशासन उन पर दबाव डालकर यह निर्णय लागू नहीं करवा रहा है।
- उन्हें बताया जायेगा कि लाउड-स्पीकर के बिना भी वे पूजा-अर्चना कर सकते हैं तथा मंदिर, मस्जिद या गुरूद्वारे के भीतर इतनी आवाज उत्पन्न कर सकते हैं जिससे इनके भीतर उपस्थित लोग आसानी से सुन सकें।
- सबसे बढ़कर उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बारे में बताया जायेगा जिसके तहत रात्रि 10 बजे के बाद एवं सुबह 6 बजे के पहले (आपात स्थिति को छोड़कर) लाउड-स्पीकर आदि के प्रयोग की अनुमति नहीं है।
यदि इन कदमों के पश्चात् भी धर्मिक समुदायों के प्रतिनिधि नहीं समझते हैं और अपनी जिद पर कायम रहते हैं तो मैं कानून सम्मत कार्यवाही करूँगा तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू करवाऊँगा।
मेरे द्वारा उठाये गये कदम के पक्ष में तर्क
- मेरे द्वारा जो कदम उठाया गया है उसके पीछे प्रमुख उद्देश्य साम्प्रदायिक सौहार्द्र को बनाए रखते हुए समस्या का निदान करना है।
- बातचीत के माध्यम से धर्मिक समुदाय के प्रतिनिधियों को समस्या से अवगत कराना तथा उन्हें विश्वास में लेकर कदम उठाना ही उचित था।
- सबसे बढ़कर बातचीत के माध्यम से सामंजस्य स्थापित करने तथा इस प्रक्रिया में सफलता न मिलने पर कानून सम्मत कार्यवाही का विकल्प खुला रखना उचित कदम है। ज्ञातव्य है कि प्रशासन की सीधी कार्यवाही से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता था।