यह मामला नैतिक दुविधा से सम्बंधित है। एक ओर इंजीनियरी स्नातक को नौकरी खोने का भय है तो वहीं दूसरी ओर उसका अंतःकरण उसे सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
- चुप रहना उसके लिए नैतिक रूप से सही नहीं है यह दर्शाने के लिए निम्न तर्क प्रस्तुत किये जा सकते हैं।
- चूँकि कम्पनी के द्वारा उच्च विषाक्त अपशेष गलत ढंग से नदी में प्रवाहित किया जा रहा है जो नदी के जल पर आश्रित लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकता है।
- इसी प्रकार यह उच्च विषाक्त अपशेष नदी के जीव-जन्तुओं एवं जैव-विविधता के लिए भी हानिकारक साबित होगा अतः पर्यावरण के संरक्षण के लिए मामले में हस्तक्षेप आवश्यक है।
- सबसे बढ़कर एक सुशिक्षित व्यक्ति, जो यह जानते हुए भी कि गलत कार्य किया जा रहा है, चुप रहता है तो इसे नैतिक एवं व्यवहारिक दोनों रूपों में गलत माना जायेगा।
(B) उसे निम्न रास्ता अपनाने की सलाह दी जानी उचित होगी-
- सर्वप्रथम उसे कम्पनी के द्वारा किये जाने वाले गलत कार्य के सम्बन्ध में समुचित प्रमाण एकत्रित करने की सलाह दी जाएगी।
- उसे कम्पनी के सी.ई.ओ. के संज्ञान में यह बात लानी चाहिए और विनम्रतापूर्वक उनके समक्ष मामले को रखना चाहिए।
- सुस्पष्ट प्रमाणों से उन्हे यह समझाने का प्रयास करना होगा कि इससे नदी पर आश्रित लोगों के स्वास्थ्य एवं नदी की जैव विविधता को गंभीर संकट उत्पन्न हो रहा है।
- यदि समस्या हल नहीं होती तो उसे इस संबंध में एक बार पुनः अपने वरिष्ठ एवं समकक्ष सहकर्मियों को अपने पक्ष में लाने का प्रयास करने एवं साथ मिलकर सी.ई.ओ. के समक्ष फिर से मामले को प्रस्तुत करने की सलाह दी जायेगी।
- यदि इन उपर्युक्त कदमों से समस्या का समाधान नहीं होता है तो उसे नौकरी की परवाह किये बिना सम्बंधित प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जायेगी ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की रक्षा की जा सके।
उसे उपर्युक्त सलाह क्यों दी जायेगी?
- ज्ञातव्य है कि वह अपने परिवार की एकमात्र जीविका चलाने वाली है तथा उसके ऊपर बीमार माता-पिता एवं भाई-बहनों के भरण पोषण का उत्तरदायित्व है अतः उसे संतुलित कदम उठाने की सलाह दी गयी है न कि सीधे कम्पनी के विरूद्ध शिकायत करने की।
- हो सकता है कि उसके द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों से कम्पनी को यह विश्वास हो जाये कि उच्च विषाक्त अपशेष लोगों एवं पर्यावरण को गंभीर हानि पहुँचा रहा है और वह अपना इरादा बदल दे। इससे उसकी नौकरी भी बच जायेगी और लोगों तथा पर्यावरण के स्वास्थ्य पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- किंतु यदि कम्पनी किसी भी प्रकार से तैयार नहीं होती तो उसे कम्पनी के विरूद्ध शिकायत करने की सलाह इसलिए दी जायेगी क्योंकि यह उसकी सामाजिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है।
- इससे उसे नौकरी खोनी पड़ सकती है किंतु ज्ञातव्य है कि वह प्रशिक्षित इंजीनियरी स्नातक है अतः उसे कोई न कोई बेहतर नौकरी जरूर मिल जायेगी।
सबसे बढ़कर जब तक उसे नयी नौकरी नहीं मिल जाती मेरे द्वारा उसकी यथा संभव आर्थिक मदद की जायेगी तथा नयी नौकरी तलाश करने में भी सहायता प्रदान की जायेगी।