कल्पना कीजिए कि आप एक सामाजिक सेवा योजना की क्रियान्विती के कार्य प्रभारी हैं, जिससे बूढ़ी एवं निराश्रय महिलाओं की सहायता प्रदान करनी है। एक बूढ़ी एवं अशिक्षित महिला योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आपके पास आती है। यद्यपि, उसके पास पात्रता के मानदंडों को पूरा करने वाले काग़जात दिखाने के लिए नहीं हैं। परन्तु उससे मिलने एवं उसे सुनने से आप यह महसूस करते हैं कि उसे सहायता की निश्चित रूप से आवश्यकता है। आपकी जाँच में यह भी आया है कि वास्तव में वह दयनीय दशा में निराश्रित जीवन व्यतीत कर रही है। आप इस धर्मसंकट में है कि क्या किया जाए। उसे बिना आवश्यक काग़जात के योजना में सम्मिलित किया जाना, नियमों का स्पष्ट उल्लंघन होगा। उसे सहायता के लिए मना करना भी निर्दयता एवं अमानवीय होगा। (a) क्या आप इस धर्मसंकट के समाधन के लिए कोई तार्किक तरीका सोच सकते हैं? (b) इसके लिए अपने कारण बतलाइए।

यह मामला सरकारी नियमों के अनुपालन के साथ-साथ समानुभूति एवं करूणा से संबंधित है। एक ओर योजना से संबंधित सभी निर्देशों  के पालन की जिम्मेदारी है वहीं दूसरी ओर पात्राता संबंधी कागजातों से विहीन एक वृद्ध एवं निराश्रित महिला को सहायता प्रदान करने का उत्तरदायित्व है।

  1.  इस धर्मसंकट से बाहर आने के लिए मेरे द्वारा  निम्न तार्किक तरीका अपनाया जायेगा-
  • समस्या को देखने से स्पष्ट है कि उस वृद्ध एवं निराश्रित महिला को सहायता की सख्त जरूरत है किंतु उसके पास पात्राता संबंधी कागजात नहीं है। यदि उसे बिना कागजातों के योजना का लाभ दिया जाता है तो इससे कानून का उल्लंघन होगा।
  • अतः इस संबंध में मेरे द्वारा उसे सर्वप्रथम किसी वृद्ध आश्रम या सरकारी आश्रय स्थल में आश्रय दिलवाने की व्यवस्था की जायेगी।
  • इसके पश्चात् उसके बारे में जानकारी एकत्र कर उसके पहचान पत्र एवं निवास प्रमाण-पत्र आदि को बनवाने की व्यवस्था की जायेगी।
  • इन समस्त कागजातों के पश्चात् वह कानूनन संबंधित सहायता योजना की पात्रता प्राप्त कर लेगी।।
  • इस प्रकार सहानुभूति, संवेदना एवं करूणा के द्वारा उस वृद्ध एवं निराश्रित महिला की मदद भी की जा सकेगी और कानून का अनुपालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  1.  मेरे द्वारा उठाये गये कदम के कारण
  • एक नौकरशाह के लिए सिर्फ कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना ही जरूरी नहीं है बल्कि उसमें सुस्पष्ट संवेदना एवं गरीब तथा वंचित समुदाय के प्रति समानुभूति एवं करूणा का होना भी जरूरी है।
  • ज्ञातव्य है कि भारत जैसे देश में जहाँ निरक्षरता के कारण एवं विकलांगता जैसी अक्षमता के कारण बहुतायत लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं प्राप्त कर पाते हैं वहाँ ऐसे लोगों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए ऐसे नौकरशाह की जरूरत है जो कानूनों के अनुपालन के साथ-साथ समानुभूति एवं करूणा जैसे गुणों से युक्त हो।

उपर्युक्त कारणों के चलते ही मेरे द्वारा कानून का अनुपालन करते हुए उस वृद्ध एवं निराश्रित महिला को सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।

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