हाल में आपको एक ज़िले के ज़िला विकास अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है। उसके बाद जल्दी ही आपने पाया कि आपके ज़िले के ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को स्कूल भेजने के मुद्दे पर काफी तनाव है। गाँव के बड़े महसूस करते हैं कि अनेक समस्याएँ पैदा हो गई हैं क्योंकि लड़कियों को पढ़ाया जा रहा है और वे घर के सुरक्षित वातावरण के बाहर कदम रख रही हैं। उनका विचार यह है कि लड़कियों की न्यूनतम शिक्षा के साथ जल्दी से शादी कर दी जानी चाहिए। शिक्षा के बाद लड़कियाँ नौकरी के लिए भी स्पर्द्धा कर रही हैं, जो पंरपरा से लड़कों का अनन्य क्षेत्र रहा है, और पुरुषों में बेरोज़गारी में वृद्धिकर रही हैं। युवा पीढ़ी महसूस करती है कि वर्तमान युग में, लड़कियों को शिक्षा और रोज़गार तथा जीवन-निर्वाह के अन्य साधनों के समान अवसर प्राप्त होने चाहिए। समस्त इलाका वयोवृद्धों और युवाओं के बीच तथा उससे आगे दोनों पीढ़ियों में स्त्री-पुरुषों के बीच विभाजित है। आपको पता चलता है कि पंचायत या अन्य स्थानीय निकायों में या व्यस्त चौराहों पर भी, इस मुद्दे पर गरमागरम वाद-विवाद हो रहा है। एक दिन आपको सूचना मिलती है कि एक अप्रिय घटना हुई है। कुछ लड़कियों के साथ छेड़खानी की गई जब वे स्कूलों के रास्ते में थीं। इस घटना के फलस्वरूप कई सामाजिक समूहों के बीच झगड़े हुए और कानून तथा व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई। गरमागरम वाद-विवाद के बाद बड़े-बूढ़ों ने लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति न देने और जो परिवार उनके हुक्म का पालन नहीं करते हैं, ऐसे सभी परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का संयुक्त निर्णय ले लिया। (a) लड़कियों की शिक्षा में व्यवाधन डाले बिना, लड़कियों की सुरक्षा को स

यह मामला एक पित्रृसत्तात्मक समाज में महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने एवं पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति के प्रबंधन से संबंधित है।

  1.  लड़कियों की शिक्षा में व्यवधान डाले बिना, लड़कियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जायेंगे-
  • सर्वप्रथम पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था करके विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच उत्पन्न तनाव की स्थिति को नियंत्रित कर कानून व व्यवस्था की स्थापना की जायेगी।
  • इसके पश्चात् दोषियों अर्थात् लड़कियों से छेड़छाड़ करने वालों को गिरफ्तार करवाकर उन पर कानून सम्मत कार्यवाही करवायी जायेगी। इस सम्बंध में मेरे द्वारा जिले के पुलिस अधीक्षक की मदद ली जायेगी।
  • पुलिस अधीक्षक महोदय से मिलकर संबंधित गाँव में पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की जायेगी ताकि लड़कियों के स्कूल जाने के रास्ते की समुचित निगरानी की जा सके।
  • संवेदनशील स्थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे स्थापित किये जायेंगे ताकि इस प्रकार कि घटनाओं की पुनरावृत्ति को नियंत्रित किया जा सके।
  • विद्यालयों में कैंप लगवाकर बालिकाओं को इस प्रकार के मामलों के प्रति जागरूक किया जायेगा तथा उन्हे संबंधित थाने का संपर्क नंबर उपलब्ध कराया जायेगा ताकि किसी भी समस्या के दौरान पुलिस को शीघ्रातिशीघ्र सूचित किया जा सके।
  1.  पीढ़ियों के बीच संबंधों में समरसता सुनिश्चित करने के लिए एवं गाँव के वयोवृद्धों की पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति का प्रबंधन करने के लिए मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जायेंगे-
  • गाँव के सरपंच से मिलकर ग्राम सभा का आयोजन कराया जायेगा तथा इस ग्राम सभा में महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठनों के संचालकों को देश की प्रसिद्ध महिला कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जायेगा।
  • एक व्याख्यान का आयोजन कराया जायेगा जिसमें बताया जायेगा कि वर्तमान में महिलायें पुरुषों के बराबर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों को अंजाम दे रही हैं।
  • वयोवृद्धों को बताया जायेगा कि पित्रृतंत्रात्मक समाज वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो गया है और सबसे बढ़कर हमारा संविधान भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करता है।
  • गाँव के वयोवृद्धों को यह भी बताया जायेगा कि प्राचीन भारत में महिलाओं को पुरुषों के बराबर शिक्षा का अधिकार प्रदान किया जाता था। उनके समक्ष गार्गी, अपाला, घोषा जैसी विदुषी महिलाओं का उदाहरण भी प्रस्तुत किया जायेगा।
  • वस्तुतः उन्हे यह समझाने का प्रयास किया जायेगा कि प्राचीन भारत में महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जाता था किंतु आगे धीरे-धीरे उन्हें पराधीन बनाने का प्रयास किया जाने लगा।
  • सबसे बढ़कर उन्हें शिक्षित महिला के लाभों से अवगत कराया जायेगा। उन्हे बताया जायेगा कि इससे देश के आर्थिक विकास में महिलायें योगदान कर सकेंगी। साथ ही उन्हे यह बताया जायेगा कि एक शिक्षित महिला पूरे घर को शिक्षित कर देती है।
इस प्रकार बालिकाओं की शिक्षा में व्यवधान डाले बिना  उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जायेगा एवं गाँव के वयोवृद्धों की पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति का प्रबंधन किया जायेगा।
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