यह मामला एक पित्रृसत्तात्मक समाज में महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने एवं पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति के प्रबंधन से संबंधित है।
- लड़कियों की शिक्षा में व्यवधान डाले बिना, लड़कियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जायेंगे-
- सर्वप्रथम पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था करके विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच उत्पन्न तनाव की स्थिति को नियंत्रित कर कानून व व्यवस्था की स्थापना की जायेगी।
- इसके पश्चात् दोषियों अर्थात् लड़कियों से छेड़छाड़ करने वालों को गिरफ्तार करवाकर उन पर कानून सम्मत कार्यवाही करवायी जायेगी। इस सम्बंध में मेरे द्वारा जिले के पुलिस अधीक्षक की मदद ली जायेगी।
- पुलिस अधीक्षक महोदय से मिलकर संबंधित गाँव में पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की जायेगी ताकि लड़कियों के स्कूल जाने के रास्ते की समुचित निगरानी की जा सके।
- संवेदनशील स्थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे स्थापित किये जायेंगे ताकि इस प्रकार कि घटनाओं की पुनरावृत्ति को नियंत्रित किया जा सके।
- विद्यालयों में कैंप लगवाकर बालिकाओं को इस प्रकार के मामलों के प्रति जागरूक किया जायेगा तथा उन्हे संबंधित थाने का संपर्क नंबर उपलब्ध कराया जायेगा ताकि किसी भी समस्या के दौरान पुलिस को शीघ्रातिशीघ्र सूचित किया जा सके।
- पीढ़ियों के बीच संबंधों में समरसता सुनिश्चित करने के लिए एवं गाँव के वयोवृद्धों की पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति का प्रबंधन करने के लिए मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जायेंगे-
- गाँव के सरपंच से मिलकर ग्राम सभा का आयोजन कराया जायेगा तथा इस ग्राम सभा में महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठनों के संचालकों को देश की प्रसिद्ध महिला कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जायेगा।
- एक व्याख्यान का आयोजन कराया जायेगा जिसमें बताया जायेगा कि वर्तमान में महिलायें पुरुषों के बराबर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों को अंजाम दे रही हैं।
- वयोवृद्धों को बताया जायेगा कि पित्रृतंत्रात्मक समाज वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो गया है और सबसे बढ़कर हमारा संविधान भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करता है।
- गाँव के वयोवृद्धों को यह भी बताया जायेगा कि प्राचीन भारत में महिलाओं को पुरुषों के बराबर शिक्षा का अधिकार प्रदान किया जाता था। उनके समक्ष गार्गी, अपाला, घोषा जैसी विदुषी महिलाओं का उदाहरण भी प्रस्तुत किया जायेगा।
- वस्तुतः उन्हे यह समझाने का प्रयास किया जायेगा कि प्राचीन भारत में महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जाता था किंतु आगे धीरे-धीरे उन्हें पराधीन बनाने का प्रयास किया जाने लगा।
- सबसे बढ़कर उन्हें शिक्षित महिला के लाभों से अवगत कराया जायेगा। उन्हे बताया जायेगा कि इससे देश के आर्थिक विकास में महिलायें योगदान कर सकेंगी। साथ ही उन्हे यह बताया जायेगा कि एक शिक्षित महिला पूरे घर को शिक्षित कर देती है।
इस प्रकार बालिकाओं की शिक्षा में व्यवधान डाले बिना उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित किया जायेगा एवं गाँव के वयोवृद्धों की पित्रृतंत्रात्मक अभिवृत्ति का प्रबंधन किया जायेगा।