आप एक पंचायत के सरंपच है। आपके क्षेत्र में सरकार द्वारा चलाया जा रहा एक प्राइमरी स्कूल है। स्कूल में उपस्थित होने वाले बच्चों को दिवस-मध्य भोजन (मिड-डे मील) दिया जाता है। हेडमास्टर ने अब भोजन तैयार करने के लिए नया रसोइया नियुक्त कर दिया है। परंतु जब यह पता चला कि रसोइया दलित समुदाय का है, उच्च जातियों के बच्चों में से लगभग आधें को उनके माँ-बाप भोजन की इजाज़त नहीं देते हैं। फलस्वरूप स्कूल में बच्चों की उपस्थिति तेज़ी से घट गई। इसके परिणामस्वरूप दिवस-मध्य भोजन की योजना को समाप्त करने और उसके बाद अध्यापन स्टॉफ को हटाने और बाद में स्कूल को बंद कर देने की संभावना पैदा हो गई। (a) इस संघर्ष पर काबू पाने और सही एवं सुखद वातावरण बनाने की कुछ साध्य रणनीतियों पर चर्चा कीजिए। (b) ऐसे परिवर्तनों को स्वीकार करने के लिए सकारात्मक सामाजिक सुखद वातावरण बनाने हेतु विभिन्न सामाजिक खंडों और अभिकरणों के क्या कर्तव्य होने चाहिए?

यह मामला जातिवाद की समस्या से सम्बन्धित है। जातिवाद की समस्या ने देश को दो प्रकार से हानि पहुँचायी है। एक तो इसने मनुष्य की एकता को तोड़ने का काम किया है वहीं दूसरी ओर इसने लोगों को एक राष्ट्र के रूप में संगठित होने से रोका है।

  1.  इस संघर्ष पर काबू पाने एवं सही तथा सुखद वातावरण बनाने के लिए निम्न साध्य रणनीतियों का प्रयोग किया जा सकता है-
  • चूँकि दलित रसोइया होने के कारण स्कूल में उपस्थिति काफी घट गयी है और स्कूल के बंद होने की स्थिति उत्पन्न हो गयी है अतः सर्वप्रथम दलित रसोइये को कुछ दिन के लिए छुट्टी पर भेजकर वैकल्पिक तौर पर किसी उच्च जाति के रसोइये को काम पर लगाना होगा।
  • इससे स्कूल में उपस्थिति के कम होने के तात्कालिक कारण का समाधन हो जायेगा तथा पहले जैसी स्थिति स्थापित हो जायेगी।
  • किंतु दूसरी ओर इस समस्या के स्थायी समाधन को तलाशने का प्रयास भी किया जायेगा क्योंकि अस्पृश्यता को अपराध घोषित किया जा चुका है।
  • सरपंच होने के नाते मेरे द्वारा ग्राम सभा का आयोजन किया जायेगा तथा लोगों को समझाया जायेगा कि जातिवाद एक सामाजिक बुराईं है जिसे न तो कानूनसम्मत माना जाता है और न ही संविधान सम्मत। सबसे बढ़कर भारतीय संविधान में सभी को समानता का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • ग्राम सभा में उच्च जाति एवं अभिजात्य तबके के उन लोगों को भी आमंत्रित किया जायेगा जो प्रगतिशील सोच वाले हैं। इन सभी के साथ मैं स्वयं दलित व्यक्ति के द्वारा निर्मित भोजन ग्रहण करूँगा ताकि गाँव के लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाया जा सके।
  1.  ऐसे परिवर्तनों को स्वीकार करने के लिए एवं सामाजिक सुखद वातावरण बनाने हेतु विभिन्न सामाजिक खण्डों एवं अभिकरणों के निम्न कर्तव्य होने चाहिए :
  • इस प्रकार की समस्या के निराकरण में सबसे प्रमुख भूमिका परिवार की है। यदि परिवार में बच्चों को मानव समानता की शिक्षा दी जाये तो निश्चित तौर पर बच्चे प्रगतिशील सोच वाले होंगे और जातिवाद जैसी बुराई से वे दूर रहेंगे।
  • सरपंच होने के नाते मेरा यह कर्तव्य होगा कि ग्रामसभा के सभी सदस्यों को जातिवाद एवं छुआछूत जैसी बुराइयों से अवगत कराऊँ तथा इन बुराइयों के बहिष्कार के लिए एक मुहिम छेडूँ।
  • इसी प्रकार प्रशासनिक अभिकरण भी इस प्रकार की समस्या के निराकरण में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। प्रशासनिक अभिकरणों के द्वारा लोगों को इस प्रकार की समस्याओं के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए तथा उल्लंघन करने वालों को सजा दी जानी चाहिए।
  • इस प्रकार यदि विभिन्न सामाजिक खण्ड एवं प्रशासनिक अभिकरण अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से करते हैं तो निश्चित तौर पर सकारात्मक एवं सामाजिक सुखद वातावरण निर्मित किया जा सकता है।
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