हाथी गुफ़ा अभिलेख
इसमें खारवेल और उसकी उपलब्धियों के संबंध में जानकारी मिलती है।
यह उड़ीसा के भुनेस्वर के समीप खंडगिरि उदयगीरी पर्वत पर स्थित है।
यह अभिलेख ब्राम्ही लिपि तथा प्राकृत भाषा में उत्कीर्ण किये गए हैं।
यह बहुत हद तक समुद्र गुप्त के प्रयाग प्रशस्ति से मिलता जुलता है।
इस अभिलेख में उसके सासन काल का उल्लिखित अंतिम वर्ष १३ वा है।
गिरनार( जूनागढ़ )अभिलेख
स्कंदगुप्त के दो अभिलेख बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।१ भीतरी स्तंभ लेख २ जूनागढ़ या गिरनार का अभिलेख।
भीतरी गढ़ स्तंभलेख(गाजीपुर जिला उत्तर प्रदेश) से उसके शासनकाल में होने वाले हुडो के आक्रमण के बारे में जानकारी मिलती है। जबकि जूनागढ़ अभिलेख द्वारा सुदर्शन लेक के पुन: निर्माण की जानकारी मिलती है।
संस्कृति भाषा में लिखा गया पहला अभिलेख रूद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।
चन्द्रगुप्त मौर्य के नाम का उल्लेख करने वाला प्रथम अभिलेख रूद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।
स्वयंवर प्रथा का उल्लेख करने वाला प्रथम अभिलेख रूद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख है।
पुलकेशियन २ का एहोल अभिलेख
एहोल अभिलेख जैन कवि रविकिर्ती द्वारा रचित बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशन २ से संबंधित है।
काली दास का उल्लेख करने करने वाला प्रथम अभिलेख पुलकेशन २ का एहोल अभिलेख है।
भानु गुप्त का एरण अभिलेख
सती प्रथा की प्रथम अभिलेखीय जानकारी ५१० ईस्वी के ऐरण अभिलेख (मध्य प्रदेश) से मिलती है। जिसमें गोपराज नामक सेना पति की पत्नी के सती होने का वर्णन है।