सम्बन्धबोधक अव्यय
जिस अव्यय से दो पदों के बीच परस्पर सम्बन्ध सूचित हो, उसे ‘सम्बन्धबोधक अव्यय’ कहते है। उदा0- परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती।
कृष्ण के साथ राधा का नाम पूज्य है।
नारी के बिना नर का अस्तित्व अधूरा है।
भेदः-
1. प्रयोग के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के दो भेद है-
(1) सम्बद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय‘ धर्म के बिना, कृष्ण के साथ
(2) असम्बद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय-मित्रों सहित, गाँव तक।
2. अर्थ के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के चैदह (14) भेद है-
(1) कालवाचक ः पहले, आगे, बाद, अब तक, पश्चात्
(2) स्थानवाचक ः आगे, पीछे, निकट, समीप, सामने, बाहर
(3) दिशावाचक ः आस-पास, ओर, तरफ, दायाँ- बायाँ, की ओर, की तरफ, के प्रति
(4) साधनवाचक ः द्वारा, माध्यम, जरिए, मार्फत, सहारे, के प्रति
(5) उद्देश्यवाचक ः लिए, हेतु, वास्ते, निमित्त
(6) व्यतिरेकवाचक ः अलावा, अतिरिक्त, सिवा, बगैर, बिना, रहित
(7) विनिमयवाचक ः बदले, स्थान पर, जगह पर
(8) सादृशवाचक ः समान, तुल्य, बराबर, योग्य, तरह
(9) विरोधवाचक ः विरुद्ध, विपरीत
(10) साहचर्यवाचक ः साथ, संग, सहित, समेत
(11) विषयवाचक ः सम्बन्ध, विनय, आश्रय, भरोसे
(12) संग्रहवाचक ः लगभग, भर, मात्र, तक, अन्तर्गत
(13) तुलनावाचक ः अपेक्षा, समक्ष, समान
(14) कारणवाचक ः कारण, परेशानी से, मारे
3. व्युत्पति के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के दो भेद है-
(1) मूल सम्बन्धबोधक ः पर्यन्त, समान, बिना
(2) यौगिक सम्बन्धबोधक ः द्वारा योग्य, बाहर