समुच्च्यबोधक अव्यय

समुच्च्यबोधक अव्यय

               जो अव्यय दो पदों, दो उपवाक्यों या दो वाक्यों को परस्पर जोड़ते है, उन्हें ‘समुच्चयबोधक अव्यय’ कहते है। यथा-  ईमानदारी और परिश्रम उन्नति के लिए आवश्यक है।

               परिश्रम करो, ताकि (किन्तु) जीवन सफल हो सके।

समुच्च्यबोधक अव्यय के भेद:-

1.            समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय

2.            व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय

1.            समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय- जो दो समान पदों, वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समानाधिकरण अव्यय कहते है। उदा0-राम और श्याम जाते हैं। वे आए और चले गए।

समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय के भेद-

(1) संयोजक                                  : तथा, और, एवं, व

(2) विभाजक/विकल्पबोधक              : या, अथवा, नही, तो, कि

(3) विरोधवाचक                                : किन्तु, परन्तु, लेकिन, वरन्, मगर

(4) परिमाणवाचक या कारणबोधक: अतएव, अतः, इसलिए, एतदर्थ, चूँकि, कारणकि, क्योंकि, फलतः फलस्वरूप।

2.            व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय- जो अव्यय मुख्य वाक्य से एक या अनेक आश्रित वाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते है। यथा-राहुल तेज है किन्तु उद्यमी नहीं है।  अभय पढ़ने में तेज है क्योंकि वह परिश्रम करता है।

व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय के भेद-

1.        कारणवाचक               : क्योंकि, इसलिए, जो कि

2.        उद्देश्यबोधक               : ताकि, जो, कि, जिससे

3.        संकेतवाचक               : चाहे, तो, परन्तु, किन्तु

4.        स्वरूपवाचक              : अर्थात्, माने, यानि कि

5.        शर्तबोधक                   : जो....तो, यदि....तो, अगर...तो।

6.        स्पष्टीकरणबोधक     : अर्थात्, यानी, मानो, जैसे, यहाँ तक कि

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