विस्मयादिबोधक अव्यय
जो अव्यय हर्ष, विषाद, उमंग, उल्लास, शोक, दुःख, घृणा आदि मनोभावों को सूचित करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते है। यथा- वाह! क्या कहना है। अहा! कितना सुन्दर दृश्य है। ओह! आप पर इतना दुःख।
विस्यमयदिबोधक अव्यय के आठ प्रमुख भेद है-
1. हर्षबोधक ः वाह, अच्छा, शाबाश
2. विस्मयबोधक ः अरे, क्या, क्यों
3. शोक बोधक ः हाय, ओह, ओले
4. तिरस्कारबोधक ः भाग-भाग, दूर-दूर, हट-हट
5. भावबोधक ः हाय, अरे, जो
6. अनुमोदनबोधक ः वाह, ठीक, अच्छा
7. सम्बोधनबोधक ः रे, अरे, हे, हो, अजी
8. घृणाबोधक ः छिः, छिः, राम-राम
नियात : वाक्य में किसी शब्द या पद के बाद जो अव्यय लगकर एक विशेष बल को व्यक्त करते है, उन्हें ‘निपात’ कहते हैं। उदाहरण-ही, भी, तो, तक, मात्र, भर
विवेक तो अपने घर जाएगा। उसने सारस्वत को भी बुलाया है। इस्माइल ने ही उसे मारा है।
नोट-निपात के प्रयोग से वाक्य के अर्थ की नई अवधारणा बनती है महत्त्वपूर्ण निपातों के प्रयोग, (अर्थानुसार भिन्न-भिन्न स्थान पर)।
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भी
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वह भी जानता है। वह पटना भी जाएगा। श्याम भी जा रहा है। विवेक हाकी भी खेलता है। उसने मुझे भी बुलाया है। श्याम ने उसे बुलाया भी है।
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ही
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वह कबड्डी ही खेलता है। राम लखनऊ ही जा रहा है। राम ही आ रहा है।
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तो
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तो तुम आ गए। आप तो आ गए। वह तो आया ही था। कल तक तो तुम अच्छे थे। आप बीमार हो। वह पढ़ता नहीं तो क्या हुआ? अरे मुझे आने तो दो।
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तक
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अब तक नहीं गए। तुमने खाया तक नही। उसने पत्र का उत्तर तक नहीं दिया। यह सब कब तक चलता रहेगा? तुम तक मेरी बात नहीं पहुँच सकी।
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भर
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उनका बेटा चार अक्ष्ज्ञर भर जानता है। उसका घर भर चोर है। राम श्याम को जानता भर है। उसने भर-पेट खाया है। उसने मिठाई खाया भर है। जी भर खा लो।
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मात्र
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मुझे पाँच रूपये मात्र चाहिये। धन मात्र से कोई बड़ा नहीं होता।
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