विलोम शब्द

विलोम शब्दभाषा जीवन की अभिव्यक्ति है और जीवन द्वन्द्वात्मक, अन्तर्विरोधात्मक है, इसलिए प्रत्येक भाषा में दो विपरीत अर्थो, मंतव्यों को व्यक्त करने के लिए अलग-अलग शब्दों का अस्तित्व रहता है। ‘विलोम’ शब्द दो शब्दों का योग है-‘वि’ तथा ‘लोम’। ‘वि’ का अर्थ है-विपरीत तथा ‘लोम’ का अर्थ है-शब्द। विपरीत भावों को व्यक्त करने के लिए विलोम शब्दों का ज्ञान आवश्यक है। जैसे जन्म का विलोम मृत्यु, कठिन का विलोम सरल आदि। ध्यातव्य है कि शब्द का विलोम उसी व्याकरिणक कोटि (तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज आदि) का होगा, जिसका वह मूल शब्द है। विलोम शब्द सदैव सजातीय ही होते हैं अर्थात् संज्ञा का विलोम संज्ञा,  सर्वनाम का विलोम सर्वनाम, विशेषण का विलोम विशेषण, क्रिया का विलोम क्रिया पद तथा क्रियाविशेषण होता है।

विलोम शब्दों की रचना निम्नलिखित प्रकार से की जा सकती है-

1.            उपसर्गो के योग द्वारा-जैसे-यश-अपयश, सन्मार्ग-कुमार्ग, सापेक्ष-निरपेक्ष, देश-विदेश, घात-प्रतिघात आदि

2.            उपसर्गो के परिवर्तन द्वारा-जैसे-आदान-प्रदान, आयात-निर्यात, संयोग-वियोग, सुलभ-दुर्लभ आदि

3.            लिंग परिवर्तन द्वारा-जैसे-माता-पिता, भाई-बहन, वर-कन्या, नारी-नर, राजा-रानी आदि

4.            स्वतंत्र शब्दों द्वारा-जैसे-गुरू-शिष्य, मूक-वाचाल, हानि-लाभ, कटु-मधु आदि

5.            प्रत्ययवत् प्रयुक्त शब्द परिवर्तन द्वारा-जैसे-गतिवान-गतिहीन, केन्द्राभिमुख-केन्द्राविमुख, केन्द्राभिगामी-केन्द्रापसारी आदि।

6.            नञ´ (अ, अन) द्वारा-जैसे-संभव-असंभव, धर्म-अधर्म, आदि-अनादि, रीति-अरीति, लौकिक-अलौकिक आादि

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