कांग्रेस की स्थापना तथा इसके कुछ महत्वपूर्ण अधिवेशन संपूर्ण महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ।

1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना लॉर्ड डफरिन के शासन काल में एक सेवा निवृत अंग्रेज ए ओ ह्यूम के द्वारा की गई। कुछ विद्वानों के अनुसार कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश सरकार के सनयंत्र के फलस्वरूप हुई। लाला लाजपत राय ने कहा कि "कांग्रेस लॉर्ड डफरिन के दिमाग की उपज है।"बंकिम चंद्र चटर्जी ने कहा"कांग्रेस के लोग पदो के भूखे हैं"। तिलक ने कांग्रेस के बारे में कहा कि" यदि वर्ष में इसी तरह एक बार मेंढ़क की तरह टर्रायेंगे तो हमे कुछ भी नहीं मिलेगा"विपिन चन्द्र पाल ने इसे"याचना संस्था"की संज्ञा दी।
पहले इस संस्था का नाम भारतीय राष्ट्रीय यूनियन था परन्तु दादा भाई नौरोजी के सुझाव पर इसका नाम बदलकर भारतीए राष्ट्रीय कांग्रेस कर दिया गया।
इसका प्रथम अधिवेशन 31 December 1885 को बंबई के गोकुल दास तेजपाल संस्कृत भवन में आयोजित किया गया। पहले यह अधिवेशन पुणे में सुनिश्चित था किन्तु वहां प्लेग के (हैजा) फैल जाने की वजह से अंतिम समय में इसका स्थान बदलकर बंबई कर दिया गया।
इस अधिवेशन में कुल72 लोगो ने भाग लिया। प्रथम अधिवेशन का अध्यक्ष ब्योमेश चन्द्र बनर्जी को बनाया गया था।
इलाहाबाद अधिवेशन1888 में इसकी अध्यक्षता करने वाला जॉर्ज यूले प्रथम अंग्रेज बना।
कलकत्ता अधिवेशन1896 रहमतुल्ला सयानी इसके अध्यक्ष बने। इसी में बंकिम चंद्र चटर्जी के एक प्रसिद्ध उपन्यास आंनद मठ से लिया गया गीत वंदे मातरम् गीत रविन्द्र नाथ टैगोर के द्वारा गाया गया।
कलकत्ता अधिवेशन1901 इसकी अध्यक्षता दिनशा इडुलची वाचा ने किया। इसी अधिवेशन में गांधी जी ने सर्वप्रथम भाग लिया।
बंबई अधिवेशन 1904 इसकी अध्यक्षता सर हेनरी काटन ने की थी। जिन्ना ने पहली बार इसी अधिवेशन में भाग लिया था। हिंदू मुस्लिम एकता की पुरजोर वकालत की। यहां इनकी मुलाकात गोपाल कृष्ण गोखले से हुई, जिन्हें वे अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। गांधी जी के गुरु भी गोखले ही  थे।
बनारस अधिवेशन1905 इसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी। इनके राजनीतिक गुरु महादेव गोविंद रानाडे थे। मोती लाल नेहरू ने इन्हें स्वशासन का महान देवदूत कहकर पुकारा था जबकि तिलक ने इन्हें भारत का रत्न कहा था।
कलकत्ता अधिवेशन1906 इसकी अध्यक्षता दादा भाई नौरोजी ने किया। दादा भाई नौरोजी ने ही सर्वप्रथम स्वराज शब्द का प्रयोग कांग्रेस के मंच से किया था वैसे तो इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग स्वामी दयानंद सरस्वती ने किया।
सूरत अधिवेशन1907 इसकी अध्यक्षता उदारवादी नेता रासबिहारी बोस ने की। कांग्रेस का प्रथम विभाजन इसी अधिवेशन नरम और गरम दल के रूप में हो गया।
कलकत्ता अधिवेशन1911 यह अधिवेशन प. विशन धर की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसी अधिवेशन में पहली बार राष्ट्रगान जन मन गण गाया गया था। पहले इसका शीर्षक भारत भाग्य विधाता रखा गया था। राष्ट्रगान का गायन समय52sec है किन्तु संक्षप्त रुप में गाने का समय २० सेकेंड है।
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