शेष महत्वपूर्ण कांग्रेस अधिवेशन संपूर्ण महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ........

लखनऊ अधिवेशन 1916 इसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी।
इसी अधिवेशन में नरम दल और गरम दल पुनः मिलकर एक हो गए थे।
इसके पुनर्मिलन में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसी अधिवेशन में १९०९ ईस्वी के मार्ले मिंटो सुधार अधिनियम के अंतर्गत प्रथक निर्वाचन मंडल की मांग को कांग्रेस ने अपनी स्वीकृत प्रदान कर दी
कलकत्ता अधिवेशन1917 इसकी अध्यक्षता एनी बेसेंट ने की थी।
दिल्ली अधिवेशन1918 इसकी अध्यक्षता मदन मोहन मालवीय के द्वारा की गई। इस अधिवेशन के वास्तविक अध्यक्ष बाल गंगाधर तिलक चुने गए थे लेकिन वे वेलेंटाइन सीरोल से संबंधित एक मुकदमे के सिलसिले में ब्रिटेन चले गए थे।
इसी अधिवेशन में कांग्रेस का दूसरी बार विभाजन हुआ।
कलकत्ता अधिवेशन  1920 इसकी अध्यक्षता लाला लाजपत राय जी ने की थी। इसी में गांधी जी ने स्वयं असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव रखा था।
वेलगांव अधिवेशन1924 यह एकमात्र अधिवेशन है जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी जी ने की थी।
कानपुर अधिवेशन1925  इसकी अध्यक्षता सरोजनी नायडू ने की थी जो कि एकमात्र भारतीय महिला थी जो अध्यक्ष बनी।
लाहौर अधिवेशन1929इसे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में महान विभाजक रेखा माना जाता है। इसकी अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरू ने की थी।
इसी अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया गया और राष्ट्रीय तिरंगा लहराया गया। तथा २६ जनवरी १९३० को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
सन् १९३० का वर्ष ऐसा पहला वर्ष है जब कांग्रेस का अधिवेशन सविनय अवज्ञा आंदोलन की वजह से आयोजित नहीं हो सका। इसलिए इस वर्षभी इसके अध्यक्ष नेहरू ही बने रहे।
फैजपुर अधिवेशन1937 पहला गांव जहां कांग्रेस का अधिवेशन संपन्न हुआ वह फ़ैजपुर (महाराष्ट्र) था। इसकी अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरू ने की थी।
हरिपुरा(गुजरात) अधिवेशन1938 यह दूसरा गांव था जहां कांग्रेस का अधिवेशन संपन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता सुभाष चन्द्र बोस ने की थी।
इसी अधिवेशन में पहली बार श्याम लाल पार्षद द्वारा रचित विजयी विश्व तिरंगा प्यारा को कांग्रेस ने मान्यता प्रदान की।
इस गीत रचना श्याम लाल पार्षद गुप्त ने गणेश शंकर विद्यार्थी के कहने पर की थी।
तिरपुरा अधिवेशन  1939 (म प्र) इस अधिवेशन के अध्यक्ष पुनः सुभाष चन्द्र बोस पट्टाभि सीतारमैया को हराकर बने किन्तु गांधी जी से मतभेद के कारण अंत में इस अधिवेशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बनाए गए।
रामगढ़ अधिवेशन1940 इसकी अध्यक्षता अबुल कलाम आजाद ने की थी। इसके बाद १९४५ तक कांग्रेस का कोई अधिवेशन संपन्न नहीं हुआ इस प्रकार अबुल कलाम आजाद सबसे अधिक समय तक कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने वाले व्यक्ति बने।
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