प्रश्न: हाल ही में अमेरिका के नागरिकता और आव्रजन सेवा विभाग ने एच-1 ?बी? वीजा के संबंध में 13 वर्ष पुरानी नीति को बदल दिया है, स्पष्ट कीजिए। साथ ही बताइए कि शरणार्थियों की जाँच प्रक्रिया के संबंध में अमेरिका ने कौन-सा कदम उठाया है?

हाल ही में अमेरिका के नागरिकता और आव्रजन सेवा विभाग के द्वारा एच-1 ‘बी’ वीजा के संबंध में नयी नीति को लागू किया गया है। इस नयी नीति के तहत आवेदकों को साबित करना होगा कि वे एच-1 बी वीजा प्राप्त करने या वीजा की अवधि बढ़ाये जाने के योग्य है।

ज्ञातव्य है कि अमेरिका में पिछले वर्षों से एच-1 बी वीजा के संबंध में जो नीति लागू थी उसे इस नयी नीति से बदल दिया गया है। पुरानी नीति आवेदकों के हितों के अनुकूल थी क्योंकि उसके तहत यदि कोई व्यक्ति वर्क (Work) वीजा के योग्य पाया जा चुका है तो इसकी अवधि बढ़ाये जाने के आवेदन पर सामान्य रूप से ही विचार किया जाता था।

अमेरिका के इस कदम से प्रवासी भारतीयों को किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना होगा?

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में लाखों की संख्या में भारतीय आई.टी. पेशेवर एच-1 बी वीजा प्राप्त कर कार्यरत है। इन लोगों को वीजा के नवीनीकरण के दौरान समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि नयी नीति के अंतर्गत उन्हें साबित करना होगा कि वे वीजा के योग्य है।

शरणार्थियों की जाँच प्रक्रिया के संबंध में अमेरिका के द्वारा उठाया गया कदम :

  • हाल ही में अमेरिका ने शरणार्थियों के संबंध में कठोर जाँच प्रक्रिया को अपनाने का निर्णय लिया है।
  • इसके तहत उन 11 देशों के नागरिकों को जिन्हें अमेरिका अपने लिए गंभीर खतरा मानता है, तभी प्रवेश दिया जाएगा जब अमेरिका को लगेगा कि इनका आना राष्ट्रीय हित में है। हालाँकि इन 11 देशों की पहचान के बारे में अमेरिका ने कुछ नहीं कहा है।
  • इस नयी प्रक्रिया के अंतर्गत शरणार्थियों के संबंध में अतिरिक्त सूचनाएँ एकत्रित की जायेगी तथा इन सूचनाओं का सत्यापन किया जायेगा ताकि यह ज्ञात किया जा सके कि शरणार्थियों के द्वारा दी गयी जानकारी में कितनी सत्यता है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि अमेरिका के द्वारा लागू की गयी नयी आव्रजन नीति से प्रवासी भारतीयों की चुनौतियाँ बढ़ेगी। इसी प्रकार शरणार्थियों के प्रति अपनायी गयी नीति से अमेरिका आने वाले शरणार्थियों को समस्या का सामना करना होगा।

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