‘नज इकोनॉमिक्स’ (Nudge Economics) का सिद्धांत प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री ‘रिचर्ड थेलर’ के द्वारा दिया गया है। ‘नज इकोनॉमिक्स’ लोगों को आसानी से लाभदायक व्यवहार बदलाव के लिए निर्देशित करता है। इस लाभदायक व्यवहार बदलाव के लिए निर्देशित करते समय ‘नज इकोनॉमिक्स’ लोगों को किसी विशेष निर्देश का पालन करने का दबाव भी नहीं बनाता है। दूसरे शब्दों में ‘नज इकोनॉमिक्स’ लोगों में लाभदायक व्यवहार बदलाव के लिए स्वाभाविक प्रेरणा उत्पन्न करता है।
रिचर्ड थेलर की व्यवहारिक अर्थशास्त्रा की अवधारणा :
- अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर को व्यवहार अर्थशास्त्र में योगदान के लिए वर्ष 2017 का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है। व्यवहार अर्थशास्त्र के तहत किसी निर्णय विशेष से लोगों के व्यवहार में स्वाभाविक परिवर्तन लाया जा सकता है।
- रिचर्ड थेलर ने अपने व्यवहार अर्थशास्त्र की अवधारणा के अंतर्गत मनोविज्ञान के साथ अर्थशास्त्र को जोड़ा है।
- उन्होंने यह सिद्ध किया है कि मनोवैज्ञानिक तर्क आर्थिक निर्णयन को गहराई से प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि रिचर्ड थेलर को व्यवहार अर्थशास्त्र का जनक माना जाता है।
- रिचर्ड थेलर ने यह भी सिद्ध किया है कि आर्थिक निर्णय लेते समय अधिकांश लोग बौद्धिकता एवं तर्क का सहारा नहीं लेते हैं।
- सबसे बढ़कर रिचर्ड थेलर ने स्पष्ट किया कि आर्थिक संदर्भ में लोगों में आत्मनियंत्रण की कमी होती है जिसके कारण वे अल्पकालिक प्रलोभनों की ओर आकर्षित होते हैं और दीर्घकालिक लाभों पर अधिक ध्यान नहीं देते हैं।
‘नज इकोनॉमिक्स’ के संबंध में नीति आयोग के द्वारा उठाया गया कदम :
- नीति आयोग के द्वारा ‘नज यूनिट’ (Nudge Unit) की स्थापना के लिए बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ समझौता किया गया है।
- इस ‘नज यूनिट’ की स्थापना के पीछे प्रमुख उद्देश्य लोगों के व्यवहार में बदलाव लाकर सरकारी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
- उल्लेखनीय है कि नीति आयोग के द्वारा गठित ‘नज यूनिट’ ने भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों मसलन स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना एवं कौशल विकास आदि के प्रति न सिर्फ लोगों को जागरूक बनाया है बल्कि संवेदनशील भी बनाया है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ‘नज इकोनॉमिक्स’ स्वाभाविक प्रेरणा से लोगों के व्यवहार में लाभदायक परिवर्तन लाता है। नीति आयोग के द्वारा भी इसका लाभ उठाया जा रहा है।