भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए दोनों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार निवेश समझौते पर सहमति बनना अनिवार्य है, स्पष्ट कीजिए। भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक विवाद के प्रमुख बिन्दु क्या हैं? साथ ही बताइए कि दोनों किस प्रकार मिलकर आगे बढ़ सकते हैं और संबंधों को नवीन आयाम प्रदान कर सकते हैं?

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार मात्र नहीं है बल्कि कूटनीतिक एवं शक्ति के बदलते समीकरणों में भी वह भारत के लिए अहम स्थान रखता है। सबसे बढ़कर भारत एवं यूरोपीय संघ न सिर्फ संसार के बड़े लोकतंत्रों में से एक है बल्कि दोनों बहु-ध्रुवीय विश्व एवं नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय ढाँचे में भी विश्वास करते हैं।

किन्तु भारत एवं यूरोपीय संघ के संबंधों के बीच द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश समझौता (Bilateral Trade and Investment Agreement) प्रमुख बाधा है। दरअसल यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते से पहले द्विपक्षीय निवेश संधि की जाए जबकि भारत द्विपक्षीय निवेश संधि एवं मुक्त व्यापार समझौते पर समग्र वार्ता करना चाहता है।

भारत एवं यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक विवाद के प्रमुख बिन्दु :

  • यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत उसे शराब एवं ऑटोमोबाइल के बाजार में अधिक पहुँच प्रदान करें। इसी प्रकार भारत चाहता है कि यूरोपीय संघ सेवा क्षेत्र में उसे अधिक छूट प्रदान करें ताकि भारत के कुशल पेशेवर आसानी से यूरोपीय संघ में प्रवेश कर सकें।
  • चूँकि भारत में डेटा की सुरक्षा (Data Security) संबंधी कोई समर्पित कानून नहीं है अतः यूरोपीय संघ के द्वारा अभी तक भारत को ‘डेटा सुरक्षा’ संबंधी प्रमाण-पत्र नहीं प्रदान किया गया है। इससे भारतीय आई.टी. कंपनियों एवं पेशेवरों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
  • यूरोपीय संघ के द्वारा भारत के द्वारा किये जाने वाले निर्यात पर बड़ी मात्र में सीमा शुल्क लगा दिया जाता है तथा कभी-कभी कुछ वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है मसलन आम एवं सब्जियों पर आरोपित प्रतिबंध को लिया जा सकता है। इससे भारत को निर्यात का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।
  • सबसे बढ़कर यूरोपीय संघ संरक्षणवाद को तो बढ़ावा देता ही है साथ ही बाल-श्रम, मानवाधिकार एवं पशुओं की हत्या आदि को लेकर भी भारतीय उत्पादों पर प्रतिबंध आरोपित करता रहता है।

भारत एवं यूरोपीय संघ किस प्रकार साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं?

  • बदलते वैश्विक परिदृश्य में जहाँ अमेरिका की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है वहीं भारत एवं यूरोपीय संघ आतंकवाद एवं जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर दृढ़ता के साथ खड़े हैं। इन मामलों में दोनों मिलकर मजबूती से आगे बढ़ सकते हैं।
  • शहरी आधारभूत ढाँचे को सशक्त बनाने एवं स्मार्ट शहरों के विकास में यूरोपीय संघ को विशेषज्ञता प्राप्त है। इस संबंध में दोनों आपसी सहयोग को बढ़ाकर  संबंधों को नया आयाम प्रदान कर सकते हैं।
  • भारत एवं यूरोपीय संघ दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों एवं बहु-संस्कृतिवाद पर विश्वास करते हैं अतः दोनों मिलकर न सिर्फ संबंधों को नया आयाम दे सकते हैं बल्कि वैश्विक नेतृत्व को भी दिशा प्रदान कर सकते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत एवं यूरोपीय संघ मिलकर प्रगति एवं विकास के मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। किन्तु इसके लिए दोनों पक्षों के बीच शीघ्रातिशीघ्र द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश संधि पर सहमति का बनना आवश्यक है।
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