हाल ही में विश्व बैंक समूह के द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट 2018 जारी की गयी है। इसमें भारत को 100वीं रैंक प्रदान की गयी है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2016 एवं 2017 की रिपोर्ट में भारत को 130वीं रैंक प्रदान की गयी थी।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट अर्थात् कारोबारी सुगमता रिपोर्ट, 2018 में न्यूजीलैण्ड को प्रथम स्थान तथा सोमालिया को अतिम 190वाँ स्थान प्रदान किया गया है। भारत की रैंकिंग में सुधार का प्रमुख कारण वर्तमान सरकार के द्वारा किये गये आर्थिक सुधार हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार के द्वारा जीएसटी सहित कईं आर्थिक सुधार मसलन नवीन इंसाल्वेंसी एवं बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code) ऑनलाइन भुगतान में तेजी तथा विदेशी कारोबार में सहूलियत जैसे कदम उठाये गये हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट किन मानकों के आधार पर तैयार की जाती है?
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट को तैयार करने में 10 मानकों का प्रयोग किया जाता है-
- कारोबार के लिए बिजली का कनेक्शन प्राप्त करने में लगने वाला समय।
- सम्पत्ति का पंजीकरण।
- व्यवसाय शुरू करने में लगने वाला समय, धन एवं इस संबंध में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया।
- अनुबंध या कांट्रैक्ट को लागू करने में लगने वाला समय।
- करों का भुगतान अर्थात् कर प्रणाली कितना आसान है।
- कारोबार के लिए ऋण प्राप्त करना।
- छोटे निवेशकों की सुरक्षा।
- दिवालियेपन का निपटान।
- निर्माण प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अर्थात औद्योगिक क्षेत्र में निर्माण के संबंध में कौन से नियम-कानून है।
- सीमा पार व्यापार अर्थात् आयात-निर्यात में कितनी सहूलियत है।
रैकिंग में सुधार आने से भारत को किस प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे?
- ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में भारत की रैकिंग में सुधार आने से देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद प्राप्त होगी। ज्ञातव्य है कि विदेशी निवेशक उन्हीं देशों में निवेश को प्राथमिकता देते हैं जहाँ कारोबारी सुगमता की स्थिति बेहतर होती है।
- विदेशी निवेश के आगमन से देश की आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने तथा औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने में मदद मिलेगी।
- सबसे बढ़कर इससे ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को भी मजबूती प्राप्त होगी क्योंकि कारोबारी सुगमता की स्थिति में सुधार से विदेशी निवेशकों के साथ-साथ देश के निवेशकों को भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट में रैंकिंग में सुधार से भारत को कईं प्रकार के लाभ होंगे। इससे विदेशी एवं स्वदेशी निवेशकों दोनों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी जिससे देश के विकास को गति मिलेगी।