राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पीछे प्रमुख आधार क्या है? पटाखे मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, सविस्तार उल्लेख कीजिए।

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा राष्ट्रीय राजाधानी क्षेत्र में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रतिबंध लगाने के पीछे प्रमुख कारण यह था कि पटाखों को जलाने से उत्पन्न होने वाली जहरीली गैसें एवं आवाज मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीरता से प्रभावित करती है।

पटाखों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पीछे मुख्य आधार :

  • पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्य आधार पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण के द्वारा प्रदान की गयी वह जानकारी है जिसमें बताया गया है कि पटाखों को जलाने के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु की गुणवत्ता काफी कम हो गयी है।
  • पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त इस जानकारी के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB-Central Pollution Control Board) को पटाखों के हानिकारक प्रभावों के अध्ययन के लिए आदेश दिया गया।
  • किंतु तकरीबन एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया जिससे सितम्बर 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की।
  • सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी के बाद केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा वाणिज्य और उद्योग मंत्रलय के अंतर्गत आने वाले विस्फोटक नियामक एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन के शोध की समीक्षा की गयी। ज्ञातव्य है कि विस्फोटक नियामक एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन ने पटाखों के प्रभाव के संबंध में अध्ययन किया है।
  • केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उपयुक्त अध्ययन एवं शोध की समीक्षा रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्ततु की। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया।

पटाखे मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?

  • पटाखों में रंग उत्पन्न करने के लिए ‘बेरियम नाइट्रेट’ एवं ‘लीथियम यौगिक’ का प्रयोग किया जाता है जो कि जलने पर जहरीली गैस उत्पन्न करते हैं जिससे श्वसन तंत्र को गंभीर हानि पहुँचती है।
  • इसी प्रकार पटाखों में कॉपर यौगिक, एल्यूमीनियम एवं एंटीमनी सल्पफाइड का प्रयोग किया जाता है। इनके जलने पर जहरीली गैस उत्पन्न होती है जो चर्म रोग के साथ-साथ कैंसरकारक (Carcinogenic) भी होती है।
  • सबसे बढ़कर पटाखों को जलाने से सल्फर डाई ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें उत्पन्न होती है जो अम्ल वर्षा के लिए उत्तर:दायी है। ज्ञातव्य है कि अम्ल वर्षा पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचाती है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा समुचित कारणों के आधार पर ही पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया है। पटाखे मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को भी गंभीर हानि पहुँचाते हैं।

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