भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के मामले में वर्ष 2016 काफी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इस वर्ष अब तक की सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया है। वर्ष 2016 में 4.81 लाख सड़क दुर्घटनायें हुई जिनमें 1.51 लाख लोगों की मृत्यु हुई। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मृतकों की संख्या में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वर्ष 2016 में प्रत्येक घंटें 55 सड़क दुर्घटनायें हुई जिनमें 17 लोगों की मृत्यु हुई अर्थात प्रत्येक 3.5 मिनट के अंतराल में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई। सड़क दुर्घटनाओं के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर रहा। कुल सड़क दुर्घटनाओं का 14.9 प्रतिशत तमिलनाडु में घटित हुई जबकि मध्यप्रदेश (11.2 प्रतिशत) तथा कर्नाटक (9.2 प्रतिशत) का इस मामले में क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान रहा।
- भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीछे उत्तर:दायी प्रमुख कारण : भारत में सड़कों का डिजाइन अनुपयुक्त है क्योंकि पैदल चलने वालों के लिए समुचित व्यवस्था के अभाव में उन्हें सड़क पर ही चलना पड़ता है जो दुर्घटना का कारण बनता है।
- देश में वाहनों की संख्या जिस गति से बढ़ रही है उस गति से सड़कों की लम्बाई में वृद्धि नहीं हुई है। अतः कमजोर आधारभूत संरचना सड़क दुर्घटनाओं का दूसरा प्रमुख कारण है।
- सड़क दुर्घटनाओं के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी, सड़क सुरक्षा से संबंधित सूचना डाटाबेस का अभाव तथा पीड़ितो की मदद करने की भावना का अभाव भी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण है।
- यातायात के नियमों का ठीक ढंग से पालन न करना तथा शराब पीकर गाड़ी चलाना भी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है।
सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम :
- यातायात के नियमों को कठोरता से लागू किया जाना चाहिए तथा सिग्नल आदि की समुचित प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए।
- सड़कों की डिजाइन इस प्रकार से निर्मित की जानी चाहिए ताकि पैदल चलने वालों के लिए समुचित व्यवस्था हो सके।
- एम परिवहन (M-parivahan) तथा ई-चालन (e-Chalan) जैसे ‘एप’ का वृहद् स्तर पर प्रयोग किया जाना चाहिए।
- सड़कों से ‘ब्लैक स्पॉट’ (Black Sports) को शीघ्रातिशीघ्र समाप्त किया जाना चाहिए। साथ ही मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को भी जल्द से जल्द समाप्त किया जाना चाहिए।
- शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की पहचान के लिए ‘ब्रीद एनालाइजर’ (Black Sports) का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा दोषी पाये जाने पर कठोर जुर्माने के साथ कारावास की सजा दी जानी चाहिए।
- सबसे बढ़कर सड़क सुरक्षा के संबंध में लोगों को जागरूक बनाया जाना चाहिए तथा इसके लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान संचालित किये जाने चाहिए।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि देश में सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता बढ़ती जा रही है। इन दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सरकार एवं नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।