हाल ही में अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में सेना के द्वारा किये गए तख्तापलट के लिए उत्तर:दायी प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि इससे भारतीय हितों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

हाल ही में अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में सेना ने तख्तापलट कर सत्तारूढ़ राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे को हिरासत में ले लिया। जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में सैनिक एवं बख्तरबंद वाहन तैनात कर दिये गये हैं तथा सरकारी कार्यालयों, संसद एवं अदालतों के रास्तों को बंद कर दिया गया है। सरकारी टेलीविजन को भी सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। ज्ञातव्य है कि राबर्ट मुगाबे पिछले 37 वर्षों से जिम्बाब्वे की सत्ता पर काबिज थे।

सेना के द्वारा किये गये तख्तापलट के लिए उत्तर:दायी प्रमुख कारण :

  • सेना का कहना है कि राबर्ट मुगाबे ने अपराधियों को संरक्षण प्रदान कर रखा था। ये अपराधी जिम्बाब्वे में समस्या उत्पन्न कर रहे थे अतः इन पर कार्यवाही के लिए ही सेना ने हस्तक्षेप किया है।
  • सेना को इस बात से भी आपत्ति थी कि मुगाबे ने अपने होने वाले उत्तराधिकारी जिम्बाब्वे के उपराष्ट्रपति ‘एमर्सन मानागागवा’ को बर्खास्त कर दिया था।
  • ज्ञातव्य है कि राबर्ट मुगाबे ने उपराष्ट्रपति ‘एमर्सन मानागागवा’ को इसलिए बर्खास्त किया ताकि वे अपनी पत्नी ‘ग्रेस’ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकें।
  • उल्लेखनीय है कि 93 वर्षीय राबर्ट मुगाबे की 52 वर्षीय पत्नी ‘ग्रेस’ का जिम्बाब्वे की राजनीति में बहुत बड़ा प्रभाव था। ‘ग्रेस’ सत्तारूढ़ पार्टी ‘जानु-पीएपफ के जी-40’ गुट की प्रमुख सदस्य है।
  • हालाँकि सेना इसे तख्तापलट नहीं मान रही है। जिम्बाब्वे के सैन्य प्रमुख ‘कांस्ट्रेटिनो चिवेंगा’ का कहना है कि मुगाबे के द्वारा संरक्षण प्राप्त अपराधियों के खात्मे के पश्चात पुरानी स्थिति को बहाल कर दिया जाएगा।

जिम्बाब्वे में घटित यह घटना भारतीय हितों को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है?

  • भारतीय दूतावास के अनुसार, जिम्बाब्वे में तकरीबन 9000 भारतीय निवास कर रहे हैं। इन भारतीयों में सर्वाधिक संख्या गुजरात के लोगों की है।
  • जिम्बाब्वे में उत्पन्न इस स्थिति से निश्चित तौर पर अन्य नागरिकों के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों का प्रभावित होना स्वाभाविक है।
  • ज्ञातव्य है कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के कारण भारतीय प्लांटेशन कामगारों ने वर्ष 1980 से जिम्बाब्वे में एकत्रित होना शुरू कर दिया था। जिम्बाब्वे को वर्ष 1980 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी।
  • सबसे बढ़कर इस प्रकार की घटनाओं से अफ्रीका  महाद्वीप में भारत के द्वारा जो संभावनायें तलाशी जा रही है, उन संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ज्ञातव्य है कि भारत-अफ्रीका  के साथ घनिष्ठ आर्थिक एवं सामरिक संबंधों की स्थापना के लिए प्रयासरत है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जिम्बाब्वे में तख्तापलट जैसी घटना वहाँ व्याप्त कुव्यवस्था एवं भ्रष्टाचार का परिणाम है। ऐसी स्थिति में शांति एवं स्थिरता के लिए तो संकट उत्पन्न ही होता है साथ ही नागरिकों एवं प्रवासी जन-समुदाय को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हाल ही में अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में सेना ने तख्तापलट कर सत्तारूढ़ राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे को हिरासत में ले लिया। जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में सैनिक एवं बख्तरबंद वाहन तैनात कर दिये गये हैं तथा सरकारी कार्यालयों, संसद एवं अदालतों के रास्तों को बंद कर दिया गया है। सरकारी टेलीविजन को भी सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। ज्ञातव्य है कि राबर्ट मुगाबे पिछले 37 वर्षों से जिम्बाब्वे की सत्ता पर काबिज थे।

सेना के द्वारा किये गये तख्तापलट के लिए उत्तर:दायी प्रमुख कारण :

  • सेना का कहना है कि राबर्ट मुगाबे ने अपराधियों को संरक्षण प्रदान कर रखा था। ये अपराधी जिम्बाब्वे में समस्या उत्पन्न कर रहे थे अतः इन पर कार्यवाही के लिए ही सेना ने हस्तक्षेप किया है।
  • सेना को इस बात से भी आपत्ति थी कि मुगाबे ने अपने होने वाले उत्तराधिकारी जिम्बाब्वे के उपराष्ट्रपति ‘एमर्सन मानागागवा’ को बर्खास्त कर दिया था।
  • ज्ञातव्य है कि राबर्ट मुगाबे ने उपराष्ट्रपति ‘एमर्सन मानागागवा’ को इसलिए बर्खास्त किया ताकि वे अपनी पत्नी ‘ग्रेस’ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर सकें।
  • उल्लेखनीय है कि 93 वर्षीय राबर्ट मुगाबे की 52 वर्षीय पत्नी ‘ग्रेस’ का जिम्बाब्वे की राजनीति में बहुत बड़ा प्रभाव था। ‘ग्रेस’ सत्तारूढ़ पार्टी ‘जानु-पीएपफ के जी-40’ गुट की प्रमुख सदस्य है।
  • हालाँकि सेना इसे तख्तापलट नहीं मान रही है। जिम्बाब्वे के सैन्य प्रमुख ‘कांस्ट्रेटिनो चिवेंगा’ का कहना है कि मुगाबे के द्वारा संरक्षण प्राप्त अपराधियों के खात्मे के पश्चात पुरानी स्थिति को बहाल कर दिया जाएगा।

जिम्बाब्वे में घटित यह घटना भारतीय हितों को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है?

  • भारतीय दूतावास के अनुसार, जिम्बाब्वे में तकरीबन 9000 भारतीय निवास कर रहे हैं। इन भारतीयों में सर्वाधिक संख्या गुजरात के लोगों की है।
  • जिम्बाब्वे में उत्पन्न इस स्थिति से निश्चित तौर पर अन्य नागरिकों के साथ-साथ भारतीय मूल के लोगों का प्रभावित होना स्वाभाविक है।
  • ज्ञातव्य है कि दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के कारण भारतीय प्लांटेशन कामगारों ने वर्ष 1980 से जिम्बाब्वे में एकत्रित होना शुरू कर दिया था। जिम्बाब्वे को वर्ष 1980 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी।
  • सबसे बढ़कर इस प्रकार की घटनाओं से अफ्रीका  महाद्वीप में भारत के द्वारा जो संभावनायें तलाशी जा रही है, उन संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ज्ञातव्य है कि भारत-अफ्रीका  के साथ घनिष्ठ आर्थिक एवं सामरिक संबंधों की स्थापना के लिए प्रयासरत है।

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जिम्बाब्वे में तख्तापलट जैसी घटना वहाँ व्याप्त कुव्यवस्था एवं भ्रष्टाचार का परिणाम है। ऐसी स्थिति में शांति एवं स्थिरता के लिए तो संकट उत्पन्न ही होता है साथ ही नागरिकों एवं प्रवासी जन-समुदाय को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

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