हाल ही में द हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय काफी चर्चा में रहा है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के विषय में जानकारी प्रस्तुत कीजिए तथा बताइए कि इसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया क्या है? अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत एवं ब्रिटेन के मध्य किस प्रकार का विवाद सामने आया है, सविस्तार स्पष्ट कीजिए?

हाल ही में द हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय काफी चर्चा में रहा है। चर्चा में रहने का प्रमुख कारण यह था कि इस न्यायालय में न्यायाधीश की अंतिम सीट के लिए भारत एवं ब्रिटेन दोनों के द्वारा अपने-अपने उम्मीद्वार खड़े किये गये थे।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय तथा इसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया :

  • द हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र संघ के छः प्रमुख अंगों में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय विवादों को निपटाने के लिए स्थायी अदालत है।
  • वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 192 सदस्य देश अपने विवादों के निपटारे के लिए आते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र या विभिन्न समझौतों, संधियों एवं क्षतिपूर्ति के मामले पर उत्पन्न हुए विवाद पर निर्णय देना अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को परामर्श देने का भी अधिकार प्राप्त है। कोई भी ऐसा पक्ष जो इसका अधिकारी है, उसके निवेदन पर यह न्यायालय किसी विधिक प्रश्न पर अपनी सलाह दे सकता है।
  • द हेग स्थित इस अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा 15 न्यायाधीश 9 वर्ष के लिए चुने जाते हैं। इन न्यायाधीशों को पुनः निर्वाचित किया जा सकता है।
  • प्रत्येक तीसरे वर्ष 5 नये न्यायाधीश चुने जाते हैं। किसी एक देश से सिर्फ एक ही न्यायाधीश चुना जा सकता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए सर्वसम्मति से लिये गये निर्णय का होना आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत एवं ब्रिटेन के बीच उत्पन्न हालिया विवाद :

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत एवं ब्रिटेन के मध्य विवाद उस समय सामने आया जब इस न्यायालय में न्यायाधीश की अंतिम सीट के लिए दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार खड़े किये।
  • दरअसल न्यायाधीश के चयन के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार को महासभा एवं सुरक्षा परिषद दोनों में बहुमत हासिल हो। ब्रिटेन को जहाँ सुरक्षा परिषद में बहुमत हासिल है वहीं भारत को महासभा के लगभग दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
  • जब किसी देश को महासभा एवं सुरक्षा परिषद दोनों में बहुमत हासिल नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में मतदान के अधिक चरण होते हैं तथा जिस देश को महासभा में लगातार बहुमत मिलता रहता है, उसी के पक्ष में निर्णय आता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बहुमत को देखते हुए ब्रिटेन के द्वारा ‘ज्वांइट कान्फ्रेंस मैकेनिज्म’ (Joint Conference Mechanism) की बात उठायी जा रही है।
  • ज्ञातव्य है कि ‘ज्वांइट कान्फ्रेंस मैकेनिज्म’ के अंतर्गत महासभा एवं सुरक्षा परिषद् से तीन-तीन सदस्य नामित किये जाते हैं। इसके बाद 6 देशों के ये प्रतिनिधि ही न्यायाधीश की अंतिम सीट के लिए निर्णय सुनाते हैं।
  • ब्रिटेन तमाम प्रयासों के बावजूद अपने प्रत्याशी को विजय नहीं दिला सका। अंततः भारत के दलबीर भण्डारी अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पुनः निर्वाचित होने में सफल रहे हैं। 

निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि दे हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र संघ का महत्वपूर्ण अंग है। यह दुनिया के विभिन्न देशों के बीच उत्पन्न विवाद को निपटाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है।

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