पनामा पेपर्स मामला क्या है, स्पष्ट कीजिए? पनामा पेपर्स मामले में हाल ही में सरकार के द्वारा दोषी लोगों एवं फर्मों के विरूद्ध कौन-से कदम उठाने के निर्णय लिये गये हैं? साथ ही बताइए कि काले धन पर सूचना के स्वतः आदान-प्रदान के लिए भारत एवं स्विटजरलैण्ड के मध्य हाल ही में किस प्रकार की सहमति बनी है?

पनामा पेपर्स वाशिंगटन स्थित ‘इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स’ (International Consortium of Investigative Journalists) नामक फर्म के द्वारा जारी किये गये दस्तावेज है। इन दस्तावेजों में विभिन्न देशों के उन लोगों के नाम शामिल है जिन्होंने विदेशों में काले धन को छिपाकर रखा है। सर्वप्रथम यह मामला वर्ष 2016 में सामने आया था।

पनामा पेपर्स के द्वारा कईं भारतीय लोगों एवं फर्मों के नाम भी उजागर किये गये। इनमें भारत से संबंधित 426 मामले सामने आये थे। बाद में गहरी छानबीन के बाद ‘सीबीडीटी’ (CBDT) के द्वारा इन 426 मामलों में से कुल 147 मामलों को कार्यवाही के योग्य माना गया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर्स के कारण ही अपनी सत्ता गँवानी पड़ी थी।

पनामा पेपर्सके दोषियों के विरूद्ध हाल ही में भारत सरकार के द्वारा उठाये गये कदम :

  • ‘पनामा पेपर्स’ के दोषियों के विरूद्ध केन्द्र सरकार के द्वारा सख्त रूख अपनाया गया है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर आयकर विभाग ने दोषियों के विरूद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर जाँच को तेज कर दिया है।
  • आयकर विभाग के द्वारा उन सात भारतीय फर्मों एवं लोगों पर नये ‘एंटी ब्लैक मनी अधिनियम’ के तहत आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ की गयी है जिनके नाम विदेश में अघोषित काला धन रखने वालों से संबंधित सूची में शामिल थे।
  • उपर्युक्त दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध वर्ष 2015 में पारित अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति (कराधान) अधिनियम के तहत कार्यवाही की गयी है। ज्ञातव्य है कि इस कानून में अघोषित संपत्ति एवं अवैध फण्ड रखने का दोषी पाये जाने पर 120 प्रतिशत कर एवं जुर्माने के साथ 10 वर्ष तक की कैद का भी प्रावधान किया गया है।
  • इन दोषी लोगों एवं फर्मों के विरूद्ध ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट’ (Prevention of Money Laundering Act) के तहत भी कार्यवाही की जायेगी। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2015 में पारित अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति (कराधान) अधिनियम में मनी लाँड्रिंग जाँच के प्रावधान भी किये गये हैं।

काले धन पर सूचना के स्वतः आदान-प्रदान के लिए भारत एवं स्विट्जरलैण्ड के बीच बनी सहमति :

  • हाल ही में काले धन के विरूद्ध भारत सरकार को अहम सफलता प्राप्त हुई है। इसका कारण यह है कि काले धन के संबंध में स्विट्जरलैण्ड की एक महत्वपूर्ण संसदीय समिति ने एक समझौते को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
  • स्विट्जरलैण्ड संसद के उच्च सदन की आर्थिक एवं कर मामलों की समिति ने भारत एवं अन्य 40 देशों के साथ इस संबंध में प्रस्तावित समझौते को अपनी मंजूरी प्रदान की है।
  • इस समझौते के लागू हो जाने से यदि किसी भारतीय का स्विट्जरलैण्ड में बैंक खाता होगा तो संबंधित बैंक स्विस अधिकारियों को खाते की समस्त जानकारी प्रदान करेंगे। इसके बाद स्विस अधिकारी स्वचालित व्यवस्था के द्वारा सारी जानकारी भारतीय अधिकारियों के पास भेज देंगे।
  • उल्लेखनीय है कि सीमा पार कर चोरी को रोकने के लिए भारत एवं स्विट्जरलैण्ड सहित तकरीबन 100 देशों ने सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान के लिए वैश्विक मानदण्डों को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। इस करार के तहत् भारत एवं स्विट्जरलैण्ड के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान वर्ष 2019 से शुरू हो जायेगा।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि भारत सरकार काले धन के संबंध में काफी सख्त है। यही कारण है कि ‘पनामा पेपर्स’ सहित अन्य देशों के साथ काले धन संबंधी जानकारी के स्वतः आदान-प्रदान के लिए भारत सरकार सक्रिय कदम उठा रही है।
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