भारत में सिविल सेवा को इस्पात का ढाँचा माना जाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सिविल सेवकों के ऊपर सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के समुचित क्रियान्वयन का उत्तर दायित्व होता है। सिविल सेवकों के लिए भारत में ‘सिविल सेवा कोड ऑफ कंडक्ट’ का निर्माण किया गया है और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इस ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ (Code of Conduct) का पालन करें।
वस्तुतः सिविल सेवकों को पक्षपात रहित होकर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्य करना होता है। उनके लिए ऐसे किसी भी कार्य को करने पर मनाही होती है जिससे कानून का जरा भी उल्लंघन होता हो या उसे करने से कानून के साथ समझौता करना पड़े। किंतु कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती है जहाँ कानून के साथ-साथ संवेदनशीलता एवं करूणा की भी जरूरत होती है।
ज्ञातव्य है कि लोक सेवकों को अपने दैनिक प्रशासनिक उत्तर दायित्वों के निर्वहन में विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ कानून के अनुपालन के साथ-साथ संवदेनशीलता एवं करूणा की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौर पर यदि एक निराश्रित वृद्ध महिला किसी ऐसे अधिकारी से मदद माँगती है जिसे निराश्रित वृद्धों के लिए गृह आवंटन का अधिकार प्रदान किया गया है। यहाँ उल्लेखनीय है कि उस वृद्ध निराश्रित महिला के पास कोई दस्तावेज नहीं है जबकि योजना का लाभ सिर्फ उन्हें प्रदान किया जायेगा जिनके पास संबंधित दस्तावेज हैं। ऐेसी स्थिति में कानून के अनुपालन के साथ-साथ करूणा एवं संवेदनशीलता की भी जरूरत होगी अन्यथा उस वृद्ध निराश्रित महिला को सहायता नहीं दी जा सकेगी।
कानून के अनुपालन के साथ-साथ सुस्पष्ट संवेदनशीलता एवं करूणा का होना क्यों जरूरी है?
- समाज में अनेक ऐसे अशिक्षित एवं कम जागरूक लोग मौजूद होते हैं जिन्हें सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के विषय में जानकारी नहीं होती है। ऐसी स्थिति में संवेदनशीलता एवं करूणा जैसे गुणों से युक्त अधिकारी लोगों को जागरूक बनाता है तथा उन्हें योजना का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- भारत जैसे देश में जहाँ शिक्षा की कमजोर स्थिति एवं जागरूकता के अभाव में करोड़ों लोग सरकारी कामकाज के लिए दूसरों पर आश्रित होते हैं वहाँ सिविल सेवक में सुस्पष्ट संवेदनशीलता एवं करूणा का महत्व बढ़ जाता है।
- बहुत से लोग सिर्फ इस कारण से लाभ से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके पास पर्याप्त दस्तावेज ही नहीं होते हैं। इस प्रकार की स्थिति में एक संवेदनशील एवं करूणामय सिविल सेवक इन लोगों को दस्तावेजों की प्राप्ति का रास्ता बताता है तथा उनकी यथासंभव मदद भी करता है। यदि सिविल सेवक सिर्फ कानूनों का अनुपालन ही सुनिश्चित करता तो संभवतः उपर्युक्त लोग दस्तावेजों के अभाव में किसी सरकारी योजना अथवा कार्यक्रम से लाभान्वित ही न हो पाते।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि सिविल सेवक अर्थात नौकरशाह में कानून के अनुपालन के साथ-साथ सुस्पष्ट संवेदनशीलता एवं करूणा का भी गुण होना चाहिए क्योंकि महज कानून का अनुपालन सुनिश्चित करने से अल्पशिक्षित एवं गरीब निराश्रित लोगों की सहायता संभव नहीं हो सकती है।