मैंग्रोव वनों के संबंध में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए? मैंग्रोव वन आर्थिक रूप से किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं? साथ ही बताइए कि मैंग्रोव वन जैव-विविधता के केन्द्र क्यों माने जाते हैं?

मैंग्रोव वनों के संबंध में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए?  मैंग्रोव वन आर्थिक रूप से किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं? साथ ही बताइए कि मैंग्रोव वन जैव-विविधता के केन्द्र क्यों माने जाते हैं?

उत्तर: मैंग्रोव वन मुख्यतः 250 उत्तरी अक्षांश से 250 दक्षिणी अक्षांश के बीच लवणीय समुद्र तटीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं। मैंग्रोव वन समुद्र तटीय क्षेत्रों के अतिरिक्त लवणयुक्त दलदली क्षेत्रो, ज्वारनदमुख तथा आर्द्रभूमि क्षेत्र में भी पाये जाते हैं।

भारत में गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में मैंग्रोव वन पाये जाते हैं। भारत सरकार के द्वारा सर्वप्रथम वर्ष 1986 में मैंग्रोव वनों के संरक्षण के लिए पहल की गयी। इस पहल के तहत देश में 39 मैंग्रोव वन क्षेत्रों की पहचान कर उनके संरक्षण की कार्यवाही शुरू की गयी। भारतीय वन सर्वेक्षण 2011 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मैंग्रोव वनों का कुल क्षेत्रफल 4662.5 वर्ग किमी है जो देश के समस्त भौगोलिक क्षेत्रफल का 0.14 प्रतिशत है। यदि वैश्विक स्तर पर देखा जाये तो इण्डोनेशिया में सर्वाधिक मैंग्रोव वन पाये जाते हैं। इण्डोनेशिया में विश्व के कुल मैंग्र्रोव वनों का 21 प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है।

मैंग्रोव वन आर्थिक रूप से किस प्रकार महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं?

  • मैंग्रोव वनों के दलदली क्षेत्रों में कईं प्रकार के जीवों का आश्रय प्राप्त होता है। इनमें मछलियों की विभिन्न प्रजातियाँ पायी जाती है। इस प्रकार मत्स्ययन के लिए ये अनुकूल आधार प्रदान कर इनके नजदीक रहने वाले लोगों की आजीविका के स्त्रोत बनते हैं।
  • मैंग्रोव वनों में उच्च कीमत वाली कईं वनस्पतियाँ पायी जाती है। इन वनस्पतियों का व्यापारिक स्तर पर बृहदतम उपयोग किया जा सकता है।
  • सबसे बढ़कर विभिन्न महत्वपूर्ण जीव-जंतुओं के आवास स्थल होने के कारण मैंग्रोव वन पर्यटन संबंधी गतिविधियों के भी केन्द्र होते हैं। ज्ञातव्य है कि सुंदरवन क्षेत्र में बंगाल टाइगर पाये जाते हैं जिन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
  • पर्यटन संबंधी गतिविधियों के कारण सरकार को भी आय होती है तथा स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।

मैंग्रोव वन जैव-विविधता के केन्द्र क्यों माने जाते हैं?

  • मैंग्रोव वनों में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु भी पाये जाते हैं। इस प्रकार ये वन समूह जैव- विविधता के केन्द्र होते हैं।
  • मैंग्रोव वनों में राइजोफेरा, एबीनेसिया, फीनिक्स, सोरेनेशिया के साथ-साथ ताड़ के चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष एवं सुंदरी वृक्ष भी पाये जाते हैं। सबसे बढ़कर इनमें कुछ महत्वपूर्ण औषधीय पौधे भी पाये जाते हैं।
  • इसी प्रकार मैंग्रोव वनों में सूक्ष्मजीव, शैवाल, मछली, श्रिम्फ, केकड़ा, समुद्री एनीमोन, चीतल, सुअर, बंगाल टाइगर तथा मोलस्का एवं एनेलिडा समुदाय के कईं महत्वपूर्ण जीव भी पाये जाते हैं।
  • इस प्रकार उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि मैंग्रोव वन आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ जैव-विविधता के भी समृद्ध केन्द्र होते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन में अहम भूमिका अदा करते हैं। ये आर्द्र भूमि (Wetland) के संरक्षण में भी योगदान करते हैं। सबसे बढ़कर ये आर्थिक रूप से उपयोगी होने के कारण जैव-विविधता के दृष्टिकोण से भी संपन्न है।
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