‘बहुसंस्कृतिवाद’ से तात्पर्य एक ऐसे समाज से है जहाँ बहुत से सांस्कृतिक समूह स्वयं की विशेषताओं को बरकरार रखते हुए एक साथ निवास करते हैं। ऐसे समाज को ‘विविधता में एकता’ (Unity in Diversity) वाला समाज माना जाता है। भारतीय समाज को बहुसंस्कृतिवाद का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है क्योंकि भारत में यह प्रवृत्ति प्राचीनकाल से मौजूद रही है।
दूसरी ओर एकलसंस्कृतिवाद, बहुसंस्कृतिवाद की विरोधी विचारधरा है। एकल संस्कृतिवाद के अंतर्गत एक संस्कृति को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। एकलसंस्कृतिवाद में सांस्कृतिक विविधता के लिए कोई स्थान नहीं होता है। एकलसंस्कृतिवाद के समर्थकों का मानना है कि अल्पसंख्यक समूहों को स्वयं की पहचान भुलाकर बहुसंख्यकों के द्वारा अपनायी जाने वाली संस्कृति को अपना लेना चाहिए।
संस्कृति के संबंध में भारतीय अवधारणा पश्चिमी देशों की अवधारणा से किस प्रकार अलग है?
- संस्कृति के संबंध में भारतीय विचारधरा बहुसंस्कृतिवाद की समर्थक है। भारतीय संस्कृति में बहुसंस्कृतिवाद बहुत गहराई से समाया हुआ है तथा प्राचीनकाल से ही यह विचार भारतीय संस्कृति का आधार बना हुआ है।
- दूसरी ओर पश्चिमी देशों में 19वीं सदी तक एकलसंस्कृतिवाद का ही वर्चस्व स्थापित रहा है।
- हालाँकि 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध से कुछ पश्चिमी देशों के द्वारा बहुसंस्कृतिवाद को महत्व दिया जाने लगा है मसलन कनाडा के द्वारा वर्ष 1971 में बहुसंस्कृतिवाद को राजकीय नीति के रूप में घोषित किया गया और वर्ष 1973 में आस्ट्रेलिया के द्वारा भी बहुसंस्कृतिवाद को अपना लिया गया किंतु इन देशों में बहुसंस्कृतिवाद को अधिक सफलता नहीं मिल सकी है।
संस्कृति के संबंध में पश्चिमी देशों के द्वारा अपनायी गयी नीति ने विश्व को किस प्रकार प्रभावित किया है?
- उल्लेखनीय है कि पश्चिमी देशों में एकलसंस्कृतिवाद का ही बोलबाला है अतः यहाँ अल्पसंख्यक समुदायों एवं अन्य धर्म के प्रवासियों से भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है जिससे आतंकवाद एवं चरमपंथ जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है।
- उदाहरण के तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा हाल ही में कुछ मुस्लिम देशों को अमेरिका आने से प्रतिबंधित करना तथा फ्रांस जैसे देशों के द्वारा बुरका पहनने पर रोक लगाने की घटनायें सामने आयी है। इन कदमों से एक धर्म विशेष पर पूर्वाग्रह के आधार पर प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं जिससे दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनायें आहत हुई है।
- इस प्रकार के कदम निश्चित तौर पर वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह महज संयोग नहीं है कि आतंकवाद से संबंधित बड़ी घटनायें यूरोप एवं अमेरिका में घटित हो रही है।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि एकलसंस्कृतिवाद जहाँ एक संस्कृति को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है वहीं बहुसंस्कृतिवाद सभी संस्कृतियों के सहअस्तित्व को मान्यता प्रदान करता है। संस्कृति के संबंध में पश्चिमी देशों की अवधारणा भारत से अलग है क्योंकि ये देश एकलसंस्कृतिवाद के समर्थक हैं।