ई-अपशिष्ट’ से तात्पर्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे से है। इसके तहत खराब लैपटॉप, मोबाइल फोन, टेलीविजन, कम्प्यूटर आदि सामानों को शामिल किया जाता है। ‘ई-अपशिष्ट’ का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। यही कारण है कि ‘ई-अपशिष्ट’ के प्रबंधन के लिए ‘ई-अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम, 2016’ को पारित किया गया है।
‘ई-अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम, 2016’ के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित है :
- ‘ई-अपशिष्ट प्रबंधान अधिनियम, 2016’ में प्रावधन किया गया है कि उत्पादक ही इन पदार्थों के संग्रहण का कार्य करेंगे अर्थात् अब वे खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पुनः खरीद करेंगे।
- अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें उन लोगों के प्रशिक्षण एवं सुरक्षा का प्रबंध करेंगी जो लोग ‘ई-अपशिष्ट’ के पुनर्चक्रण (Recycling) में संलग्न है।
- अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि जो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का बहुतायत में इस्तेमाल करते हैं उन्हें वार्षिक ‘आईटीआर’ (ITR) दाखिल करना होगा।
- सबसे बढ़कर अधिनियम में ई-अपशिष्टों के निस्तारण के संबंध में स्थानीय निकायों को उल्लेखनीय जिम्मेदारी सौंपी गयी है। स्थानीय निकायों को ई-अपशिष्ट एकत्रित कर पुनर्चक्रण एजेन्सी के पास भेजना होगा।
- इसमें यह भी प्रावाधन किया गया है जहाँ तक संभव हो सके पुराने उपकरणों का दोबारा उपयोग किया जाना चाहिए तथा अनुपयोगी अपशिष्टों को निस्तारित कर दिया जाना चाहिए।
‘ई-अपशिष्ट’ मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
- ई-अपशिष्टों में कैडमियम, मरकरी लेड जैसी विषाक्त धतुओं का प्रयोग किया जाता है। ये विषाक्त धातुएँ कैंसरकारक (Carcinogenic) होने के साथ-साथ मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
- इन ई-अपशिष्टों को जलाने से सूक्ष्म कण एवं विषाक्त धुआँ निकलते हैं जो श्वसन संबंधी विभिन्न प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं। सबसे बढ़कर इन्हें जलाने से हाइड्रोकार्बन भी मुक्त होते हैं जो अम्लीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाकर अम्ल वर्षा (Acid Rain) के लिए उत्तरदायी है।
- जब ई-अपशिष्टों को जल में प्रवाहित कर दिया जाता है तो इससे समुद्री जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार ई-अपशिष्ट जैव-विविधता के लिए भी हानिकारक है।
- सबसे बढ़कर जब ई-अपशिष्टों का निस्तारण खुली भूमि में कर दिया जाता है तो उससे मृदा प्रदूषण होता है। साथ ही इनसे विषैले पदार्थ रिस-रिसकर भौम जल (Ground Water) को भी दूषित करते हैं।
निष्कर्ष : निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि ई-अपशिष्टों के समुचित निस्तारण की समस्या बढ़ती जा रही है। ये अपशिष्ट मानव हस्तक्षेप एवं पर्यावरण को गंभीरता से हानि पहुँचाते हैं। इनके समुचित निस्तारण के संबंध में ‘ई-अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम, 2016’ निश्चित तौर पर प्रभावी साबित होगा।