बालफोर घोषणा ब्रिटिश सरकार के द्वारा की गयी घोषणा है। इसके तहत ब्रिटिश सरकार ने अरब प्रभुत्व वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में यहूदियों के लिए एक राष्ट्र के गठन को समर्थन देने का वादा किया था। ज्ञातव्य है कि यहूदी पूरे विश्व में फैले हुए थे और आर्थिक रूप से काफी संपन्न थे किंतु इनके पास कोई स्वयं का देश नहीं था।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह हिटलर के द्वारा तकरीबन साठ लाख यहूदियों को गैस चेम्बर के द्वारा मार दिया गया क्योंकि वह इन्हें निकृष्ट मानता था। यही कारण था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के सहयोग से फिलीस्तीनी क्षेत्र में यहूदियों के लिए इजरायल नामक एक नये राष्ट्र का गठन किया गया। किंतु इजरायल के गठन को न तो अरब देशों और न ही फिलीस्तीन ने स्वीकार किया। यही कारण है कि आज तक इनके बीच संघर्ष जारी है।
वे कौन-से कारण थे जिनके चलते ब्रिटेन को यहूदीवाद का समर्थन करना पड़ा?
- ब्रिटेन के द्वारा यहूदीवाद का समर्थन इसलिए किया गया ताकि यदि रूस एवं ब्रिटेन के बीच युद्ध हो तो ब्रिटेन, रूस को कमजोर कर सके। ज्ञातव्य है कि रूस में बड़ी संख्या में यहूदी रहते थे। ब्रिटेन यहूदीवाद को समर्थन प्रदान कर रूस में रहने वाले इन यहूदियों को रूस से अलग-थलग करना चाहता था।
- यहूदी समुदाय विश्व के सर्वाधिक धनी समुदायों में से एक है। यह समुदाय तकनीकी रूप से भी काफी आगे है। यही कारण था कि ब्रिटेन ने बालफोर घोषणा में यहूदियों का समर्थन किया क्योंकि वह यहूदियों की क्षमता एवं काबिलियत से परिचित था।
- जब ऑटोमन साम्राज्य के अंत के पश्चात साइकस-पाइकॉट समझौता हुआ तो ब्रिटेन की स्थिति काफी मजबूत हो गई। ब्रिटेन ने नये यहूदी राष्ट्र के गठन के वादे को पूरा करने का निर्णय लिया जिसके तहत उसने यहूदियों को फिलीस्तीनी क्षेत्र में बसने की इजाजत दे दी।
इस संबंध में ब्रिटेन के द्वारा अपनाये गये रूख से किस प्रकार की समस्यायें सामने आयी है?
- ब्रिटेन के द्वारा अरब प्रभुत्व वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में यहूदियों को बसने की इजाजत देने से अरब राष्ट्रों एवं नवगठित यहूदी राष्ट्र इजरायल के बीच संघर्ष की शुरूआत हो गयी।
- इस संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों के बीच छः दिवसीय युद्ध, आठ महीने का युद्ध एवं योम किप्पूर जैसे अनेक युद्ध हुए। यह संघर्ष वर्तमान समय तक जारी है। इसके कारण पश्चिम एशियाई क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता को खतरा उत्पन्न होता रहता है।
- इजरायल के गठन से हमास एवं पीएलओ जैसे आतंकवादी संगठनों का उदय हुआ है। इन आतंकवादी संगठनों ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
- सबसे बढ़कर ब्रिटेन के उपर्युक्त निर्णय से फिलीस्तीनी क्षेत्र आज भी कुव्यवस्था का शिकार बना हुआ है। इस क्षेत्र में न सिर्फ गरीबी चरम पर है बल्कि मानव अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित गंभीर समस्यायें भी मौजूद हैं।
निष्कर्ष- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बालफोर घोषणा ने यहूदी राष्ट्र इजरायल के गठन में अहम भूमिका अदा की है। ब्रिटेन के इस निर्णय से अरब एवं इजरायल के बीच जो संघर्ष प्रारंभ हुआ वह तकरीबन सात दशकों के पश्चात भी जारी है।