भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही गोवंश को महत्व दिया जाता रहा है। उदाहरण के तौर पर, हड़प्पा सभ्यता के अंतर्गत कूबड़ वाले सांड की पूजा की जाती थी। इसी प्रकार आगे वैदिक काल में आर्यों के द्वारा सर्वाधिक महत्व गाय को ही दिया जाता था। यह महत्व हमेशा बना रहा है। आज के समय में भी हिन्दू समुदाय में गाय को पवित्र पशु का दर्जा प्राप्त है। यही कारण है कि कुछ समय पूर्व राजस्थान उच्च न्यायालय के द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान किये जाने की बात कही गयी। गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया जाना चाहिए या नहीं, इस संबंध में किसी निर्णय पर पहुँचने से पहले इसके पक्ष एवं विपक्ष में दिए गए तर्कों का समुचित आकलन करना जरूरी होगा।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किये जाने के पक्ष में तर्क :
- गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान किये जाने से भारतीय संविधान में उल्लिखित उद्देश्य की पूर्ति की जा सकेगी। ज्ञातव्य है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 में स्पष्तः उल्लेख किया गया है कि राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा। विशेष रूप से गायों एवं बछड़ो तथा अन्य दुधरू एवं वाहक पशुओं की नस्लों के परिरक्षण और सुधार के लिए और उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा।
- गाय एक बहुउपयोगी जानवर है। गाय की सींगों में कास्मिक किरणों (Cosmic Rays) से सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता होती है। गाय के गोबर से जहाँ कम्पोस्ट खाद एवं गोबर गैस का निर्माण किया जाता है वहीं गाय का मूत्र विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में प्रयुक्त होता है। इस प्रकार राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्रदान कर गाय को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
- गाय को दुग्ध उत्पादन के लिए सबसे बेहतर जानवर माना जाता है। इससे देश के दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में काफी मदद प्राप्त हुयी है।
- भारत अभी भी एक कृषि प्रधान देश है जहाँ गरीब किसानों के द्वारा अभी भी पशुओं के श्रम का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार गाय को सुरक्षित रखने का सर्वाधिक लाभ यह होगा कि कृषि को सुरक्षित रखने में मदद प्राप्त होगी।
- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किये जाने से स्थानीय नस्लों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। स्थानीय नस्लों को सुरक्षित रखने से नस्लीय विविधता बनी रहेगी जिससे आगे नवीन नस्लों का विकास किया जा सकता है।
- गाय को राष्ट्रीय का पशु का दर्जा प्रदान किये जाने से देश के उस विशाल धर्मिक समूह की भावनाओं को तुष्ट करने में मदद मिलेगी जो यह तर्क प्रस्तुत करता है कि गाय के वध को अनुमति प्रदान करने से उनके धर्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को हानि पहुँचती है।
- गाय को सुरक्षित रखने से उसके गोबर एवं मूत्र आदि पर अधिक शोध किये जा सकेंगे जिससे नवीन आयुर्वेदिक औषधियों के विकास में मदद मिल सकती है।
- गाय ही एक ऐसा जानवर है जो ऑक्सीजन लेकर ऑक्सीजन छोड़ती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि गाय एक उपयोगी जानवर है जिसको सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किये जाने के विपक्ष में तर्क :
- यदि गाय को राष्ट्रीय पशुघोषित कर दिया जाता है और उसके वध को प्रतिबंधित कर दिया जाता है तो इससे अल्पसंख्यकों की सवेंदना को ठेस पहुँच सकती है और वे स्वयं को समाज से कटा हुआ मान सकते हैं।
- इससे सबसे बड़ी हानि उन लोगों को उठानी होगी जो गाय के माँस व्यापार में लगे हुए है। इन लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ सकता है जिससे देश में बेरोजगारी की समस्या अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती है।
- इसी प्रकार इससे चमड़ा उद्योग को हानि उठानी पड़ेगी। देश को अपनी जरूरत का चमड़ा विदेशों से आयात करना होगा जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बाहर जायेगी और अर्थव्यवस्था कमजोर होगी।
- गाय को राष्ट्रीय पशुघोषित किये जाने से भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को हानि पहुँच सकती है। इसका कारण यह है कि एक समूह के विरोध के बावजूद सरकार के द्वारा धार्मिक मुद्दे को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है।
- चूँकि गाय एक पालतू जानवर है अतः इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अन्तर्गत संरक्षण नही प्राप्त है। यह अधिनियम मात्र जंगली जानवरों को संरक्षण प्रदान करता है। यही कारण है विभिन्न राज्यों ने गाय के संरक्षण के लिए अलग अलग कानून बनाये है। सीधे केन्द्र सरकार को गाय के संरक्षण के सम्बन्ध में कानून आदि नहीं बनाना चाहिए।
- गाय का माँस खाना लोगों के चयन की स्वतन्त्रता एवं खाने की स्वतन्त्रता से सम्बन्धित है अतः गाय को राष्ट्रीय पशुघोषित कर उसके माँस की बिक्री आदि पर रोक लगाना उचित कदम नहीं होगा।
- गाय के माँस के निर्यात से भारत को भारी मात्र में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है। यदि इस पर नियंत्रण लगा दिया गया तो इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
- यदि गाय को राष्ट्रीय पशुघोषित कर दिया जाता है तो इससे कृषि करने वाले किसानों पर अत्यधिक बोझ पड़ सकता है। ज्ञातव्य है कि किसान गायों के अनुपयोगी होने के पश्चात उन्हें बेंच देते थे किन्तु राष्ट्रीय पशुघोषित किये जाने के बाद वे ऐसा नहीं कर पायेंगे जिससे उन पर बोझ बढ़ेगा।
निष्कर्ष- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि यद्यपि गाय को भारतीय समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाता रहा है किंतु इसे राष्ट्रीय पशु के रूप में घोषित किया जाना उचित नहीं होगा।