जीएसएलवी मार्क-3 के विषय में आप क्या जानते हैं, सविस्तार स्पष्ट कीजिए? जीएसएलवी मार्क-3 का क्या महत्व है? साथ ही बताइए कि जीएसएलवी मार्क-3 के सफल प्रक्षेपण से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को किस प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे?

जीएसएलवी मार्क-3 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का एक प्रक्षेपण रॉकेट है। इसके माध्यम से इसरो के द्वारा जीसैट-19 को कक्षा में स्थापित किया गया था। जीएसएलवी मार्क-3 में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन लगा हुआ है। इस रॉकेट के माध्यम से अब इसरो 2000 किग्रा से अधिक उपग्रहों को भी आसानी से कक्षा में स्थापित कर सकता है। ज्ञातव्य है कि अभी तक 2000 किग्रा से अधिक उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए इसरो को विदेशी प्रक्षेपण एजेन्सियों पर निर्भर रहना पड़ता था।

जीएसएलवी मार्क-3 का महत्व :

जीएसएलवी मार्क- के सफल प्रक्षेपण का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे भारत की प्रक्षेपण क्षमता ठीक दोगुनी हो गयी है। पहले भारत को 2000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए विदेशी प्रक्षेपण एजेन्सियों का सहारा लेना पड़ता था जबकि इस प्रक्षेपण के पश्चात भारत 4000 किलोग्राम तक के वजन के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर सकता है।

जीएसएलवी मार्क-3 में स्वदेश विकसित क्रायोजेनिक इंजिन का प्रयोग किया गया है। इस प्रकार भारत उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है जो क्रायोजेनिक तकनीकी में विशेषज्ञता रखते हैं। ज्ञातव्य है कि साल 1993 में रूस ने अमेरिका के दबाव में क्रायोजेनिक तकनीक देने से भारत को इंकार कर दिया था। इसके बाद रूस के द्वारा भारत को सिर्फ दो क्रायोजेनिक इंजिन दिये गये। इन इंजनों का अध्ययन कर भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वयं की मेहनत से क्रायोजेनिक इंजिनों का विकास किया।

जीएसएलवी मार्क-3 से इसरो को होने वाले लाभ :

जीएसएलवी मार्क-3 के सफल प्रक्षेपण से इसरो की प्रतिष वैश्विक स्तर पर स्थापित हुयी है। इस सफल प्रक्षेपण से इसरो को निम्नलिखित लाभ होंगे-

  • इसरो अभी तक विश्व में हल्के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए जाना जाता था। अमेरिका जैसे देश भी कम लागत एवं उच्चतम गुणवत्ता के कारण इसरो की सेवा प्राप्त करते थे। जीएसएलवी मार्क-3 के सफल प्रक्षेपण के पश्चात इसरो भारी एवं वजनदार उपग्रहों 4000 किलाग्राम तक को प्रक्षेपित करने की सामर्थ्य प्राप्त कर चुका है।
  • चूंकि इसरो अब 4000 किलोग्राम तक के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर सकता है अतः वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में इसरो एक सश्क्त दावेदार के रूप में उभरेगा।
  • इस प्रक्षेपण के पश्चात इसरो के लिए धन अर्जित करने के नवीन स्त्रोत खुलेंगे जिससे देश के विदेशी मुद्रा भण्डार में वृद्धि होगी।
  • इसरो वित्तीय रूप से सशक्त होगा जिससे वह शोध एवं तकनीकी विकास में अधिकाधिक धन व्यय कर सकेगा। जैसे कि भारतीय वैज्ञानिकों ने परिश्रम जारी रखा और क्रायोजेनिक तकनीक में महारत हासिल कर लिया।
  • इस प्रक्षेपण में भारत में स्वदेशी तौर पर विकसित लीथियम आयन बैटरी का प्रयोग किया गया है। लीथियम आयन बैटरी का वजन कम होता है जबकि ये अधिक शक्तिशाली होती हैं। इससे सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भारत को बैटरी का आयात अन्य देशों से नहीं करना होगा।
  • जीएसएलवी मार्क-3 के सफल प्रक्षेपण से भारत की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचेगी क्योंकि अब भारत को 2000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए विदेशी प्रक्षेपण एजेन्सियों का सहारा नहीं लेना होगा।
  • इस प्रक्षेपण से भारत दुनिया का छठवाँ ऐसा देश बन गया है जिसे क्रायोजेनिक तकनीकी में महारत हासिल है। इस प्रकार तकनीकी विशेषज्ञता के मामले में इसरो का नाम वैश्विक स्तर पर स्थापित हो गया है।
  • भारत के द्वारा अब अपने मानव मिशन को पूरा करने की सामर्थ्य आ गयी है। वह स्वयं की क्षमता से अंतरिक्ष में मानव मिशन भेज सकता है।
  • सबसे बढ़कर भारत अब चंद्रयान-2 मिशन को भेज सकता है क्योंकि उसके पास अब बेहतर तकनीकी है।

निष्कर्ष- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जीएसएलवी मार्क-3 से अंतरिक्ष प्रक्षेपण के मामले में इसरो आत्मनिर्भर हो गया है। अब इसरो को भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए के लिए विदेशी प्रक्षेपण एजेन्सियों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

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