जलवायु परिवर्तन की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए डीजल एवं पेट्रोल चलित वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। इलेक्ट्रिक वाहनों के सकारात्मक पक्षों का उल्लेख कीजिए। साथ ही बताइए कि इलेक्ट्रिक वाहनों के विपक्ष में कौन-से तर्क प्रस्तुत किये जा रहे हैं?

जलवायु परिवर्तन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2016 कार्बन उत्सर्जन के मामलें में ऐतिहासिक रहा है क्योंकि पिछले तीन दशकों में इतना अधिक उत्सर्जन कभी नहीं हुआ था। कार्बन उत्सर्जन में पेट्रोल एवं डीजल चलित वाहनों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। यही कारण है कि विभिन्न देशों की सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के सकारात्मक पक्ष :

  • इलेक्ट्रिक वाहनों से पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि डीजल एवं पेट्रोल चालित वाहन काफी मात्र में कार्बन का उत्सर्जन करते है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों में पर्यावरण प्रदूषण की गुंजाइश नहीं होती है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से ऊर्जा सम्बन्धी समस्या का निदान किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि देश अपनी पेट्रोलियम जरूरत का तकरीबन दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है।
  • डीजल एवं पेट्रोल के आयात बिल को कम करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सकेगी। ज्ञातव्य है कि डीजल एवं पेट्रोल के आयात में भारी मात्र में बहुमूल्य विदेशी मुद्रा का व्यय होता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन से जलवायु परिवर्तन की समस्या का निदान काफी हद तक किया जा सकता है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
  • चूँकि इलेक्ट्रिक वाहनों के रख-रखाव एवं संचालन में काफी कम खर्च आता है अतः इलेक्ट्रिक वाहनों का किराया भी काफी कम होगा।
  • किराया आदि कम होने तथा पर्यावरण हितैषी होने के कारण लोगों के द्वारा अधिकाधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जायेगा।
  • सबसे बढ़कर सरकार स्वयं इलेक्ट्रिक वाहनों के पक्ष में है। ऊर्जा मंत्रलय ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2030 तक देश को डीजल एवं पेट्रोल से चलने वाली कारों से मुक्त बना दिया जाये।

इलेक्ट्रिक वाहनों के नकारात्मक पक्ष :

  • इलेक्ट्रिक वाहनों को संचालित करने का विचार महत्वाकाँक्षी है क्योंकि इन वाहनों को संचालित करने के लिए देश में समुचित आधारभूत संरचना मौजूद नहीं है।
  • चूँकि इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी से संचालित होते है अतः देश में बैटरियों की आपूर्ति पर्याप्त होनी चाहिए। ज्ञातव्य है कि बैटरियों के उत्पादन में देश अभी भी आत्मनिर्भर नहीं है।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए पर्याप्त चार्जिंग बिन्दु होने चाहिए ताकि इन्हें कहीं भी चार्ज किया जा सके। प्रत्येक स्थान पर इन चार्जिंग बिन्दु की स्थापना का कार्य आसान नहीं होगा।
  • इन वाहनों को चार्ज करने के लिए विद्युत की आवश्यकता होगी अतः सरकार को यह सुनिश्चितकरना होगा कि विद्युत का उत्पादन प्रदूषण मुक्त हो।
  • भारत का मोटर वाहन अधिनियम इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुरूप नहीं है। इस कारण से यदि इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन व्यापक तौर पर किया जाता है। तो इस मोटर वाहन अधिनियम में व्यापक बदलाव लाना होगा।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को अनुमति प्रदान करने से राज्य सरकारों के ऊपर अतिरिक्त दबाव बनेगा। जिससे सहकारी संघवाद की भावना को ठेंस पहुँच सकती है।
  • भारत के उद्योग एवं कर्मचारी यद्यपि परम्परागत वाहनों के निर्माण में महारत रखते हैं किन्तु इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए उन्हें अपग्रेड करना होगा।
  • यदि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को व्यापक तौर पर अनुमति प्रदान कर दी जाती है तो मौजूदा वाहनों का क्या होगा।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश में विद्युत की पर्याप्त आपूर्ति होनी चाहिए। ज्ञातव्य है कि देश में अभी हजारों गाँव बिजली की सुविधा से वंचित है।

निष्कर्ष- निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान के लिए जरूरी है कि नवाचारी उपायों को अपनाया जाये तथा परंपरागत व्यवस्था को तिलांजलि दी जाये। इलेक्ट्रिक वाहन इसी नवाचारी व्यवस्था का एक अंग है अतः इन्हें प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।

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