आप एक ईमानदार और जिम्मेदार सिविल सेवक हैं। आप प्रायः निम्नलिखित को प्रेक्षित करते हैं : (A) एक सामान्य धारणा है कि नैतिक आचरण का पालन करने से स्वयं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और परिवार के लिए भी समस्याएँ पैदा हो सकती है, जबकि अनुचित आचरण जीविका लक्ष्यों तक पहुँचने में सहायक हो सकता है। (B) जब अनुचित साधनों को अपनाने वाले लोगों की संख्या बड़ी होती है, तो नैतिक साधन अपनाने वाले अल्पसंख्यक लोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता। (C) नैतिक तरीकों का पालन करना वृहद् विकासात्मक लक्ष्यों के लिए हानिकारक है। (D) चाहे कोई बड़े अनैतिक आचरण में सम्मिलित न हो, लेकिन छोटे-मोटे उपहारों का आदान-प्रदान प्रणाली को अधिक कुशल बनाता है। उपर्युक्त कथनों की उनके गुणों और दोषों सहित जाँच कीजिए।

नौकरशाही स्थायी कार्यपालिका का अंग होती है जिसके पास अस्थायी कार्यपालिका अर्थात सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों को लागू करने का

उत्तर: दायित्व होता है। वर्तमान युग में भ्रष्टाचार सभी जगह अपनी गहरी पैठ बना चुका है। नौकरशाही भी इससे अछूती नहीं रह गयी है। यही कारण है कि जब एक ईमानदार एवं जिम्मेदार नौकरशाह अपना दायित्व संभालता है तो वह आसपास की परिस्थितियों को देखकर अक्सर कुछ प्रश्नों से रूबरू होता है।

प्रश्न: में दिए गए प्रत्येक कथन एवं उनके गुण एवं दोषों की जाँच हम निम्न प्रकार से कर सकते हैं-

  1.  कथन (a) से यह तात्पर्य है कि जब एक नौकरशाह नैतिक मार्ग का अनुसरण करता है तो उसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है जबकि यदि वह अनैतिक आचरण का सहारा ले तो वह न सिर्फ समस्याओं से बच सकता है बल्कि जीविका लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकता है।

उपर्युक्त कथन के गुण एवं दोष निम्नलिखित हैं-

गुण- यदि नौकरशाह के द्वारा उपर्युक्त कथन का अनुसरण किया जाता है तो इससे वह तात्कालिक तौर पर स्वयं को समस्याओं से बचाने में सफल हो सकता है किंतु दीर्घकालिक तौर पर उसे कईं अन्य समस्याओं का सामना करना पडे़गा। उदाहरण के तौर पर, यदि नौकरशाह एक बाहुबली  खनन माफिया की अनुचित माँगों के समक्ष समझौता कर लेता है तो तात्कालिक तौर पर उसे खनन माफिया  की प्रतिक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही उसे खनन माफिया  की ओर से कुछ आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो सकते हैं। किंतु दीर्घकालिक तौर पर नौकरशाह का यह कदम न तो नैतिक रूप से उचित होगा और न ही समाज एवं देश के हित में होगा।

अवगुण- जब हम उपर्युक्त कथन के अवगुणों पर विचार करते हैं तो ज्ञात होता है कि अनैतिक मार्ग का अनुसरण प्रारंभिक तौर पर लाभकारी हो सकता है किंतु इस मार्ग के अनुसरण से न सिर्फ नौकरशाह की सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी संदेह के घेरे में आ जायेगी बल्कि इससे उसके लिए भविष्य में भी कईं प्रकार की समस्याएँ आ सकती है।

जाँच एवं परीक्षण- इस प्रकार एक ईमानदार एवं जिम्मेदार सिविल सेवक के रूप में नैतिकता एवं सत्य के मार्ग पर अग्रसर होते हुए निर्धारित दायित्वों का पालन ही उचित होगा। कहा भी गया है कि सत्य का मार्ग दुर्गम एवं पथरीला जरूर हो सकता है किंतु विजय सत्य की ही होती है। ‘मुण्डकोपनिषद’ में उल्लिखित ‘सत्यमेव जयते’ इस बात की पुष्टि करता है। 

  1.  कथन (b) से यह तात्पर्य है कि यदि बहुसंख्यक लोग अनैतिक मार्ग का अनुसरण करते हैं तो अल्पसंख्यक लोगों के द्वारा नैतिक मार्ग का अनुसरण करने से कोई लाभ नहीं होता है।

गुण- यदि किसी संस्थान में अधिकांश लोग अनैतिक रास्ते पर अग्रसर हैं तो उस संस्थान के उन लोगों को हमेशा विरोध का सामना करना होगा जो नैतिकता एवं सत्य का पालन करते हैं। इस प्रकार यदि नैतिकता एवं सत्य के मार्ग पर अग्रसर व्यक्ति भी अन्य लोगों के समान अनैतिक मार्ग का समर्थन करते हैं तो उन्हें विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अवगुण- अनैतिक मार्ग पर चलना अनैतिक एवं विनाशकारी होता है। जबकि सत्य के मार्ग पर अग्रसर एकमात्र व्यक्ति भी बड़े से बडे़ साम्राज्य को ध्वस्त करने की सामर्थ्य रखता है। महात्मा गाँधी ने सत्य के मार्ग पर अडिग रहकर ही ब्रिटिश साम्राज्य को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।

जाँच एवं परीक्षण- किसी ने सत्य ही कहा है कि, ‘यदि एक मोमबत्ती बुझ जाती है तो वहाँ प्रकाश के स्थान पर अंधेरा हो जाता है।’  ( If one Candle goes out, there is darkness instead of light.) कहने का तात्पर्य यह है कि एक अकेला व्यक्ति ही नैतिकता एवं सत्य के मार्ग पर चलकर परिवर्तन लाने में सक्षम होता है। सबसे बढ़कर ऐसे व्यक्ति के समर्थन के लिए पूरा समाज खड़ा रहता है।

  1. कथन (c) का तात्पर्य है कि नैतिक मार्ग पर चलकर बृहत् विकासात्मक लक्ष्यों को नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

गुण- कथन का विश्लेषण करने के पश्चात् जब हम इसके गुण पर विचार करते हैं तो पाते हैं कि नैतिकता से समझौता कर बृहत् विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है किंतु दीर्घकालिक तौर पर यह कदम विनाशकारी होगा। उदारहरण के तौर पर, यदि किसी विदेशी कंपनी के प्लांट की स्थापना के लिए जंगलों को काटना पड़ रहा है तो पर्यावरणीय नैतिकता से समझौता कर जंगलों को काटने की अनुमति दी जा सकती है। इससे तात्कालिक तौर पर भारी विदेशी निवेश के आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा और बृहत् विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति की जा सकती है। किंतु दीर्घकालिक तौर पर यह कदम पृथ्वी के अस्तित्व के लिए ही संकट बन सकता है।

अवगुण- बृहत् विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि नैतिक मार्ग का अनुसरण किया जाये क्योंकि नैतिकता का मार्ग न सिर्फ बृहत् विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक है बल्कि यह चिरस्थायी विकासात्मक लक्ष्यों का मार्ग भी प्रशस्त करता है। उदाहरण के तौर पर विदेशी निवेश के साथ-साथ पर्यावरणीय नैतिकता को वरीयता देने से पृथ्वी के अस्तित्व को संकट में डाले बिना विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

जाँच एवं परीक्षण- इस प्रकार स्पष्ट है कि नैतिक मार्ग पर चलकर ही बृहत् एवं स्थायी विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है न कि अनैतिक मार्ग के द्वारा। अनैतिकता पतन का मार्ग प्रशस्त करती है।

  1. कथन (d) से तात्पर्य है कि कार्य के लिए मोटीवेशन (Motivation) बनाये रखने के लिए छोटे-छोटे उपहार एवं आर्थिक लाभ आवश्यक होते हैं।

गुण- छोटे-मोटे उपहारों एवं आर्थिक लाभ से कार्य के लिए प्रेरणा प्राप्त होती है तथा इससे आपसी संबंधों में भी समरसता आती है।

अवगुण- छोटे-मोटे उपहारों एवं आर्थिक लाभ का सबसे बड़ा अवगुण यह है कि कभी भी ये लालसायें बृहत् स्वरूप धारण करती हैं। फिर यह सर्वमान्य सत्य है कि इच्छायें असीमित होती है तथा इनका कभी अंत नहीं होता है।

जाँच एवं परीक्षण- इस प्रकार स्पष्ट है कि एक ईमानदार एवं जिम्मेदार नौकरशाह को इस प्रकार के छोटे-मोटे प्रलोभनों से बचना चाहिए। सबसे बढ़कर इस प्रकार के छोटे-मोटे लाभ प्राप्त करने को सिविल सेवा की आचरण संहिता के विरूद्ध भी माना जाता है।

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