आप आई.ए.एस अधिकारी बनने के इच्छुक हैं और आप विभिन्न चरणों को पार करने के बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए जब आप साक्षात्कार स्थल की ओर जा रहे थे तब आपने एक दुर्घटना देखी जहाँ एक माँ और बच्चा जो कि आपके रिश्तेदार थे, दुर्घटना के कारण बुरी तरह से घायल हुए थे। उन्हें तुरंत सहायता की आवश्यकता थी। आपने ऐसी परिस्थिति में क्या किया होता? अपनी कार्यवाही का औचित्य समझाइए।

यह निजी हित एवं सामाजिक हित के बीच द्वंद्व से संबंधित है। एक ओर जहाँ मेरा भविष्य दाँव पर है वहीं दूसरी ओर दुर्घटना में घायल दो लोगों का जीवन दाँव पर है। इस प्रकार की परिस्थिति में मेरे द्वारा निम्न कदम उठाये जाते-

  • मेरे द्वारा सर्वप्रथम घायल माँ एवं बच्चे को प्राथमिक उपचार (First Aid) मसलन रक्त स्त्राव रोकने आदि का प्रबंध किया जाता। ज्ञातव्य है कि दुर्घटना के बाद का एक घंटा काफी क्रिटिकल (Critical) होता है। यदि इस दौरान घायलों को सहायता उपलब्ध करा दी जाये तो उनकी जान बचने की संभावना 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

प्राथमिक उपचार करने के पश्चात् मेरे द्वारा तुरंत अपने किसी नजदीकी मित्र और रिश्तेदारों को फोन किया जायेगा ताकि वे शीघ्रता से सहायता के लिए पहुँच सकें।

  • इसके साथ ही मेरे द्वारा आपातकालीन पुलिस सेवा (डायल 100) तथा आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा (डायल 102) का भी प्रयोग किया जायेगा ताकि घायलों को शीघ्रताशीघ्र समुचित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध् करायी जा सके।
  • यदि उपर्युक्त में से किसी का प्रबंध नहीं हो पाता है तो मैं तुरंत घायलों को किसी निकटतम अस्पताल में स्वयं पहुँचाने का प्रबंध करूँगा और डॉक्टर एवं चिकित्सकीय स्टॉफ को सारी परिस्थिति से अवगत कराकर साक्षात्कार के लिए निकल जाऊँगा।
  • इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है और मुझे साक्षात्कार के लिए विलम्ब हो सकता है किंतु मुझे पूरा विश्वास है कि सारी परिस्थिति बताने के पश्चात् आयोग के द्वारा मुझे अवसर दिया जायेगा। अपनी बात की पुष्टि के लिए मैं समस्त प्रमाण अर्थात् घटना से संबंधित सारी जानकारी आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर दूँगा।
  • यदि आयोग के द्वारा मुझे अवसर नहीं दिया जाता है, जिसकी संभावना बहुत कम है, तो मैं आयोग के निर्णय को चुनौती दूँगा क्योंकि मेरा पक्ष नैतिक एवं सही है। यद्यपि आयोग नियमों एवं कानूनों से बँधा हुआ है और तय प्रक्रिया का ही पालन कर रहा है किंतु ऐसे नियमों एवं कानूनों का कोई मतलब नहीं है जो मानव एवं समाज के हित में न हो।
  • साक्षात्कार के पश्चात् मैं शीघ्रता से अस्पताल की ओर निकल जाऊँगा और घायलों के इलाज की यथासंभव सर्वोत्तम व्यवस्था कराने का प्रबंध करूँगा।
  • मेरे द्वारा घायलों के प्रति उपर्युक्त दायित्व का निर्वहन मात्र इसलिए नहीं किया जायेगा कि वे मेरे रिश्तेदार हैं बल्कि उनके स्थान पर यदि कोई अनजान भी होता तो भी मेरे द्वारा उपर्युक्त दायित्व का समान भाव से निर्वहन किया जाता है। एक भावी सिविल सेवक एवं सबसे बढ़कर एक मानव एवं जिम्मेदार नागरिक होने के नाते लोगों की जान बचाना मेरा कर्त्तव्य है।

इस प्रकार उपर्युक्त कदमों के माध्यम से मैं अपने निजी हित एवं सामाजिक हित के बीच सामंजस्य बैठा सकूँगा और अपनी दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन समुचित तरीके से कर सकूँगा।

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