लोन वुल्फ हमला (Lone Wolf Attack) राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा।

लोन वुल्फ हमले से तात्पर्य ऐसे आतंकवादी हमलों से है जिन्हें किसी एक व्यक्ति के द्वारा अंजाम तक पहुँचाया जाता है। ये आक्रमण बड़े आतंकवादी समूहों के द्वारा किये जाने वाले हमलों से अलग है। हाल के समय में लोन वुल्फ हमलों में काफी वृद्धि आयी है।

            पिछले कुछ वर्षों के दौरान पश्चिमी देशों में ऐसा देखा गया है कोई एक सिरपिफरा व्यक्ति किसी पब या होटल में प्रवेश करता है और अंधाधुंध फायरिंग के द्वारा कईं निर्दोष लोगों की हत्या कर देता है। अमेरिका में 1 अक्टूबर, 2017 को स्टीफन पैडक नामक एक 64 वर्षीय अमेरिकी नागरिक ने लॉस वेगास के एक होटल में प्रवेश कर 59 लोगों की हत्या कर दी तथा 500 से अधिक लोगों को घायल कर दिया। अंत में स्टीफन पैडन ने स्वयं को भी गोली मार ली। अमेरिकी पुलिस के द्वारा इसे लोन वुल्फ हमले का दर्जा दिया गया।

            पिछले वर्ष फ्रांस में ‘बास्तील दिवस’ समारोह का आयोजन किया जा रहा था। इसी आयोजन के दौरान मोहम्मद लाहाउज नामक एक व्यक्ति ने सैकड़ों लोगों के ऊपर भारी वाहन चढ़ा दिया जिससे 86 लोगों की मृत्यु हो गयी। बाद में इस व्यक्ति के द्वारा स्वीकार किया गया कि वह आईएसआईएस नामक आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ है तथा उसी विचारधारा के तहत् ही उसने यह कार्यवाही की।

            दरअसल इस प्रकार के एकाकी हमलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। चूँकि इन हमलों में एक ही व्यक्ति शामिल होता है अतः उसकी गतिविधियों को पहचान पाना या पूर्व अनुमान लगा पाना काफी कठिन होता है। ऐसे एकाकी हमले घात लगाकर किये जाते हैं ताकि सुरक्षा एजेन्सियों को भनक तक न लग सके।

            अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि आखिर लोन वुल्फ हमलों के पीछे कौन-से प्रमुख कारण हैं? क्या इनके पीछे धर्मिक कारण शामिल हैं? या फिर इन हमलों को उन लोगों के द्वारा अंजाम दिया जाता है जिन्हें अतिवादी बना दिया जाता है?

            लोन वुल्फ हमलों के पीछे धार्मिक कारण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वर्तमान समय में आतंकवादी समूह तकनीकी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। धर्म के नाम पर युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है और अपने समूह में शामिल होने के लिए उन्हें हर प्रकार की सुविधा प्रदान किये जाने का वादा भी किया जा रहा है।

            युवाओं को धर्म के नाम पर अतिवादी बनाया जा रहा है तथा उनकी मानसिकता को परिवर्तित किया जा रहा है। मानसिक रूप से परिवर्तित इस प्रकार के युवा हर प्रकार का कदम उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं। अभी कुछ दिन का समय ही बीता है जब केरल से कुछ युवक आईएसआईएस में भर्ती होने के लिए देश से बाहर चले गए थे। इस बात का खुलासा उस समय हुआ जब इन्हीं भागे हुए युवकों में से एक को पकड़ा गया। इस युवक ने सारी वास्तविकता सामने रखी।

            लोन वुल्फ हमलें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वर्तमान समय में आतंकवादी तकनीकी का बेहतर इस्तेमाल करना जान गये हैं। उदाहरण के तौर पर, आईएसआईएस जैसा आतंकी संगठन इंटरनेट आधारित सेवाओं का प्रयोग कर युवाओं का धर्म के नाम पर माइंडवाश कर रहा है।

            अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में ऐसी हजारों वेबसाइट मौजूद हैं जो आतंकवादी संगठनों से संबंधित है। आतंकवादी एक-दूसरे के पास संदेश भेजने के लिए ‘रीमेलर’ जैसी सेवाओं का प्रयोग करने लगे हैं। ‘रीमेलर’ सेवा के तहत एक संदेश कईं इंटरनेट पतों से होते हुए निर्धारित गंतव्य तक पहुँचता है जिससे भेजने वाले के पते की जानकारी प्राप्त करना बहुत कठिन होता है। जबकि आम तौर पर प्रयोग किये जाने वाले ई-मेल के पते की जानकारी आसानी से की जा सकती है।

            इस प्रकार स्पष्ट है कि लोन वुल्फ आतंकवादी से तात्पर्य एक ऐसे अकेले व्यक्ति से है जो स्वयं हमले को अंजाम देता है। यद्यपि यह व्यक्ति किसी विचारधारा से प्रभावित हो सकता है और किसी बाहरी समूह के समर्थन में कदम उठा सकता है किंतु सारी कार्यवाही को वह स्वयं अंजाम तक पहुँचाता है।

            अब बात आती है कि लोन वुल्फ हमलों को किस प्रकार नियंत्रित किया जाय क्योंकि लोन वुल्फ हमले सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। दरअसल इस प्रकार के हमलों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक स्तर पर एकीकृत कार्यवाही करनी होगी। इसके तहत् सरकार, सिविल सोसाइटी, मीडिया, धार्मिक नेता एवं स्वयं आम जनमानस को मिलकर कदम उठाना होगा।

            सरकार के स्तर पर इस प्रकार की नीतियों को अपनाना होगा ताकि देश के विभिन्न समुदायों एवं अप्रवासी लोगों को अलगाव की भावना महसूस न हो। उदाहरण के तौर पर, वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा सीधे तौर पर एक विशेष जाति के लोगों को अमेरिका आने से प्रतिबंधित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है। इस जाति से संबंधित लोग निश्चित तौर पर ऐसे कदमों से अमेरिका के प्रति घृणा की भावना विकसित करते हैं। यह घृणा की भावना कब घृणा अपराध में परिवर्तित हो जाये इसका कोई अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

            सरकार के द्वारा हमेशा उन नीतियों को लागू किया जाना चाहिए जो सभी धार्मिक समूहों के लिए हितकारी हो। यदि सरकार के द्वारा किसी एक विशेष समुदाय को प्रमुखता प्रदान की जाती है तो अन्य समुदाय उसके प्रति घृणा की भावना विकसित करते हैं। इन्हीं में से कुछ लोग अतिवाद की ओर झुक जाते हैं और लोन वुल्फ जैसे हमलों को अंजाम देते हैं।

            इस संबंध में सिविल सोसाइटी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सिविल सोसाइटी के द्वारा समाज में सौहार्द्र एवं सामंजस्य को बनाये रखने के लिए कदम उठाये जा सकते हैं। सबसे बढ़कर सिविल सोसाइटी के द्वारा काउंसिलिंग के माध्यम से लोगों को अतिवाद की ओर जाने से रोका जा सकता है।

            सिविल सोसाइटी के अतिरिक्त इस संबंध में मीडिया का भी अहम योगदान हो सकता है। यदि मीडिया के द्वारा एक जिम्मेदार एवं संतुलित रिपोर्टिंग की जाती है और धार्मिक विश्वासों तथा संस्कृति के सही अर्थों को प्रस्तुत किया जाता है तो निश्चित तौर पर समाज में सौहार्द्र एवं सामंजस्य की वृद्धि होती है।

            लोगों को अतिवाद की ओर जाने से रोकने में धार्मिक नेताओं की भी अहम भूमिका होती है। धार्मिक नेता अपने अनुयायियों को सौहार्द्र एवं सामंजस्य बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। ज्ञातव्य है कि धार्मिक नेताओं की उनके अनुयायियों के बीच काफी प्रतिष्ठा होती है और अधिकांशतः लोग उनकी बातों का अनुकरण करते हैं।

            सबसे बढ़कर समाज में पारस्परिक सौहार्द्र में वृद्धि के संबंध में आम जनमानस की बहुत बड़ी भूमिका होती है। यदि आम जनमानस यह तय कर ले कि उन्हें धर्म एवं जाति जैसे विभेद अलग नहीं कर सकते हैं तो निश्चित तौर पर दुनिया की कोई ताकत उनके बीच विरोध का बीज नहीं बो सकती। ऐसे समाज में सभी लोग मिलकर प्रगति की ओर अग्रसर होने का प्रयास करते हैं।

            निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि यद्यपि लोन वुल्फ हमले जैसी समस्यायें बढ़ती जा रही है किंतु यह भी सत्य है कि दुनिया भर में धर्म के नाम पर लोगों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुछ पश्चिमी देशों के द्वारा तो किसी खास देश की विशेष जाति को ही निशाने पर लिया जा रहा है और उन पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध आरोपित किये जा रहे हैं। इस प्रकार की घटनायें निश्चित तौर पर संबंधित जाति एवं समुदाय को पीड़ित करती है और वे बाध्य होकर अतिवादी कदम उठाते हैं। यदि इस प्रकार की घटनाओं को नियंत्रित करना है तो सरकार, सिविल सोसाइटी, मीडिया, धर्मिक नेताओं एवं आम जनमानस को मिलकर कदम उठाने होंगे। ऐसे कदम जो जाति-धर्म से परे हों तथा आपसी सामंजस्य एवं सौहार्द्र को बढ़ावा देने वाले हों।

           

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