अर्द्ध विराम (;):-
1. यदि वाक्य का वाक्यांश के साथ दूसरे वाक्य या वाक्यांश का दूर का सम्बन्ध बतलाना हो, तो वहाँ अर्द्ध विराम का प्रयोग होता है।
इस प्रकार कि वाक्य रचना में वाक्यांश एक दूसरे से स्वतंत्र होते हुए भी, एक वाक्य के अन्तर्गत होने के कारण एक-दूसरे से सम्बन्ध रखते है। ऐसे वाक्यांशें में अर्द्ध विराम लगाकर एक को दूसरे से अलग किया जाता है। उदाहरण - (1) यह एक धूर्त आदमी है; ऐसा उसके मित्र भी मानते है। (2) यह घड़ी अधिक दिनों तक नहीं चलेगी; यह सस्ती है। (3) कामकाज बंद है; कल कारखाने बन्द है; व्यापार कारोबार बन्द है; बेरोजगारी फैली है; सर्वज्ञ हाहाकार है।
2. यदि प्रधान वाक्य से सम्बन्ध अन्य सहायक वाक्यांशों का प्रयोग किया जाये तो अर्द्ध विराम (;) लगाकर सहायक वाक्यांे को अलग किया जा सकता है। उदाहरण- (1) छोटे-छोटे बच्चे पानी मेें घुस जाते है; पानी उछालते है; तरंगों से खेलते। (2) महाकवि निराला का व्यक्तित्त्व आकाश की तरह व्यापक है; सागर की तरह गम्भीर है; हिमालय की तरह उन्नत है; आकाशीय पिण्ड की तरह प्रकाशवान है।
3. सभी तरह की डिग्रियों या उपाधियों के लेखन में अर्द्ध विराम का प्रयोग होता है। उदाहरण-(1) एम0ए0; एलएल0बी0; एम0एससी0; पीएच0डी0; बी0ए0; बी0एड0; डिप-इन-लिव0 साइन्स।