पूर्ण विराम (।) और इनके प्रयोग

पूर्ण विराम (।) :

पूर्ण विराम का अर्थ है-पूरी तरह ठहरना या रूकना। जहाँ पर वाक्य की क्रिया अन्तिम रूप ले ले, विचार प्रवाह एक दम टूट जाये, वहाँ पूर्ण विराम का प्रयोग होता है। उदाहरण- मैं आदमी हूँ। राम वन को चले गये।

               कभी-कभी किसी वस्तु, व्यक्ति या घटना का सजीव वर्णन करते समय वाक्यांशों के अंत में पूर्ण विराम का प्रयोग होता है। जैसे-गोरा रंग। उन्नत ललाट। तीक्ष्ण नासिका। विराट कल। कशरती काया। शिथिल त्वचा। किन्तु मुँख मण्डल पर स्वाभिमान युक्त तेज। ऐसा विलक्षण व्यक्तित्त्व।

               उदाहरण-कान के पास बालों की सफेदी। पानीदार बड़ी-बड़ी आँखे। रौबियत मूँछे।  चौड़ा माथा। बाहर बंद गले का कोट।

               दोहा, चैपाई, सवईयाँ आदि के प्रत्येक पंक्ति के अन्त में एक पूर्ण विराम (।) और छंद के अन्त में दोहरे पूर्ण विराम (।।) का प्रयोग किया जाता है।

1.            गुरु गोविन्द दोड खड़े, काकै लागौ पाव,

               बलहारी गुरु आपणै, गोविन्द दियौ बताऐ।

2.            बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,

               जो दिल खोजा आपना, मुझसो बुरा न कोय।

3.            नारी विवश नरसकल गुसाई।

               नाचही नट मरकट की नाही।।

नोट:

1. प्रश्नावाचक और विस्मयादिबोधक वाक्यों को छोड़कर प्रायः सभी वाक्यों के अन्त में पूर्ण विराम (।) होता है।

2. आधुनिक हिन्दी लेखन में कुछ लोग अंग्रेजी अनुकरण में हिन्दी वाक्यों में फुल स्टाॅप (.) का प्रयोग कर रहे।

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