अल्पविराम (,)और इनके प्रयोग

अल्पविराम (,)और इनके प्रयोग

               अल्पविराम का शाब्दिक अर्थ है- थोड़ी देरे के लिए रूकना या ठहरना। हिन्दी में प्रयुक्त सभी विराम चिन्हों में अल्पविराम का प्रयोग सबसे अधिक होता है, इसके प्रयोग की निम्नलिखित स्थितियाँ है-

1.            वाक्य में जब दो से अधिक समान पदों (शब्दों), पदांशों (शब्दांशो) अथवा वाक्य में संयोजक अपव्यय ‘और’ की गंुजांइश हो तो वहीं अल्पविराम का प्रयोग होता है।

जैसे-   (1)   पदों में    -  राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुध्न राजभवन में पधारे।

               (2)   वाक्यों में   - वह रोज आता है, काम करता है और चला जाता है।

                                             - राम, राजेन्द्र और कमलेश्वर घर चले गये।

               (3)          छोटी, हल्की, गोल और किनारीदार थाली लाओ।

                              उठकर, नहाकर, खाकर विवेक काॅलेज चला गया।

2.            जहाँ शब्दों की पुनरावृत्ति की जाए और भावातिरेक में उन विशेष बल दिया जाये वहाँ अल्पविराम (,) का प्रयोग होता है।

जैसे-   सुनो-सुनो, लता जी गा रही है।

               नही-नही हरगिज नही हो सकता।

               वह बहुत दर से, बहुत दूर से आ रहा है।

नोट:   यदि ये बातें नाटकिय ढंग से कही जाये तो अल्प विराम के स्थान पर विस्मयादिबोधक चिन्ह लगाए जा सकते है।

3.            यदि वाक्य में कोई अन्तरवर्ती पद्यांश आ जाए तो वहाँ अल्प विराम का ही प्रयोग किया जाता है।

जैसे-   सेठ फूलचन्द्र, चारों बेटों के नाम, कुल 12 लाख रू0 छोड़ गये है।

               क्रोध, चाहे जैसा भी हो, मनुष्य की विवेक शून्यता का परिचायक है।

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