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कार्बन उत्सर्जन के मामले में 2016 ऐतिहासिक साल रहा
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम संबंधी संगठन के द्वारा जारी की गई वार्षिक ग्रीन हाउस गैस बुलेटिन में बताया गया है कि वर्ष 2016 में कार्बन उत्सर्जन में भारी वृद्धि हुई है।
बीते कुछ दशकों में वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बहुत ही तीव्र गति से बढ़ी है। यदि 25 लाख वर्ष पहले के हिम युग से इसकी तुलना की जाये तो पर्यावरण में 100 गुना अधिक कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन हुआ है।
वर्ष 2015 में 400.0 पीपीएम (Parts Per million) कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ था किन्तु वर्ष 2016 में 403.3 पीपीएम कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन हुआ।
वर्ष 2016 में कार्बन डाईऑक्साइड की वृद्धि पिछले दशक की तुलना में 50 प्रतिशत तीव्र रही जिसके कारण औद्योगिक क्रांति के समय के कार्बन उत्सर्जन से 45 प्रतिशत अधिक कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन साल 2016 में हुआ।
वर्ष 2016 में कार्बन डाईऑक्साइड में वृद्धि का प्रमुख कारण कोयला, तेल, सीमेंट आदि का इस्तेमाल अधिकाधिक मात्रा में करना रहा तथा इस वर्ष जंगलों की कटाई भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। साथ ही अल नीनो के प्रभाव के कारण भी कार्बन डाईऑक्साइड के स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1990 के बाद से कार्बन डाईऑक्साइड एवं अन्य ग्रीन हाउस गैसों के कारण ग्लोबल वार्मिंग में 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
कार्बन उत्सर्जन में इस प्रकार की वृद्धि पृथ्वी के अस्तित्व के लिए ही संकट उत्पन्न करने में सक्षम है। ज्ञातव्य है कि 2015 के पेरिस जलवायु के समझौते के तहत इस शताब्दी के अंत तक वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक काल से 2 प्रतिशत से कम रखने के लिए सहमति बनी थी।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम संबंधी संगठन के द्वारा जारी की गई वार्षिक ग्रीन हाउस गैस बुलेटिन में बताया गया है कि वर्ष 2016 में कार्बन उत्सर्जन में भारी वृद्धि हुई है।
बीते कुछ दशकों में वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बहुत ही तीव्र गति से बढ़ी है। यदि 25 लाख वर्ष पहले के हिम युग से इसकी तुलना की जाये तो पर्यावरण में 100 गुना अधिक कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन हुआ है।
वर्ष 2015 में 400.0 पीपीएम (Parts Per million) कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ था किन्तु वर्ष 2016 में 403.3 पीपीएम कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन हुआ।
वर्ष 2016 में कार्बन डाईऑक्साइड की वृद्धि पिछले दशक की तुलना में 50 प्रतिशत तीव्र रही जिसके कारण औद्योगिक क्रांति के समय के कार्बन उत्सर्जन से 45 प्रतिशत अधिक कार्बन डाईआक्साइड का उत्सर्जन साल 2016 में हुआ।
वर्ष 2016 में कार्बन डाईऑक्साइड में वृद्धि का प्रमुख कारण कोयला, तेल, सीमेंट आदि का इस्तेमाल अधिकाधिक मात्रा में करना रहा तथा इस वर्ष जंगलों की कटाई भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई। साथ ही अल नीनो के प्रभाव के कारण भी कार्बन डाईऑक्साइड के स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1990 के बाद से कार्बन डाईऑक्साइड एवं अन्य ग्रीन हाउस गैसों के कारण ग्लोबल वार्मिंग में 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
कार्बन उत्सर्जन में इस प्रकार की वृद्धि पृथ्वी के अस्तित्व के लिए ही संकट उत्पन्न करने में सक्षम है। ज्ञातव्य है कि 2015 के पेरिस जलवायु के समझौते के तहत इस शताब्दी के अंत तक वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक काल से 2 प्रतिशत से कम रखने के लिए सहमति बनी थी।
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