23वाँ संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (Cop-23) जर्मनी के बॉन शहर में आयोजित

23वाँ संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 7 से 11 नवम्बर, 2017 को जर्मनी के बॉन शहर में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता फिजी के द्वारा की गई। 23वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में 197 देशों के तकरीबन 25,000 लोग भाग ले रहे हैं। पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के पश्चात् इस सम्मेलन को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका के द्वारा पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से अपना नाम वापस लिया जा चुका है।

  • जर्मनी के बॉन में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन फिजी के प्रधनमंत्री फ्रैंक बैरीमनामा के द्वारा किया गया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकने के लिए सभी देशों से तत्काल कदम उठाने की बात कही है।
  • यह जलवायु परिवर्तन सम्मेलन राइन नदी के किनारे खुले मैदान में आयोजित किया गया जबकि अभी तक के सारे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन बड़ी इमारतों के कक्षों के भीतर आयोजित किये जाते थे।
  • इस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए साइकिलों का प्रयोग किया गया तथा प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर ईको-फ्रेंडली बोतलों का इस्तेमाल किया गया। सबसे बढ़कर इस सम्मेलन में किसी भी प्रकार के कागज का प्रयोग नहीं किया गया।
  • बॉन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में शाकाहार पर बल दिया गया तथा 60 प्रतिशत से अधिक भोजन शाकाहारी रखा गया था जबकि इससे पहले आयोजित पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में 70 प्रतिशत से अधिक भोजन मांसाहारी था।
  • 23वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में की गई प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्ञातव्य है कि वर्ष 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें सभी देशों ने इस सदी के अंत तक पृथ्वी के तापमान को 1.5 से 2.0 डिग्री तक सीमित रखने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
  • जर्मनी के बॉन में आयोजित इस 23वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में आपसी बातचीत के लिए पिफजी के द्वारा ‘तलानोआ डायलॉग’ नामक एक नया मंच उपलब्ध् कराया गया।

क्या है तलानोआ डायलॉग?

तलानोआ प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपों एवं फिजी में आयोजित की जाने वाली एक परंपरागत कबीलाई बैठक है। इस परंपरागत कबीलाई बैठक में विभिन्न पक्ष एक कहानी के माध्यम से अपनी बात को बड़ी सहजता से प्रस्तुत करते हैं तथा गंभीर से गंभीर मसलों पर बहुत ही आसानी से सौहार्द्रपूर्ण निष्कर्ष तक पहुँचने का प्रयास करते हैं।

  • ‘तलानोआ डायलॉग’ के द्वारा 2020 से पहले ही जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के संबंध में विभिन्न देशों को आपस में मिलकर नई शुरूआत के लिए प्रोत्साहित करना है। ज्ञातव्य है कि 2020 के पश्चात् पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में बनी सहमति को लागू किया जाना है।
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