‘नासा’ (NASA) के द्वारा हाल ही में घोषणा की गई है कि वर्ष 1988 के पश्चात् ओजोन की परत में अब तक का सबसे छोटा छिद्र बना है। उल्लेखनीय है कि अंटार्कटिका क्षेत्र में प्रति वर्ष ओजोन की परत में एक छिद्र बनता है। सितम्बर, 2017 में ओजोन की परत में बना यह छिद्र वर्ष 1988 के पश्चात् का सबसे छोटा छिद्र है।
- ज्ञातव्य है कि दक्षिण गोलार्द्ध में सितम्बर से दिसम्बर महीने के दौरान शीत ऋतु के पश्चात् सूर्य की किरणों की वापसी से उत्प्रेरक प्रभाव पड़ता है। इस उत्प्रेरक प्रभाव के कारण अंटार्कटिक क्षेत्र में ओजोन छिद्र का निर्माण होता है। वर्ष 2016 में ओजोन परत में सबसे बड़ा छिद्र पाया गया था। इस छिद्र का आकार 89 लाख मील के बराबर था। ओजोन परत में सबसे पहले छिद्र का पता वर्ष 1985 में अंटार्कटिका के ऊपर लगाया गया था।
- ओजोन की परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों से मनुष्य की रक्षा करती है। पराबैंगनी किरणें कैंसर, मोतियाबिंद जैसी बीमारियों के अलावा अनेक अन्य प्रकार की बीमारियों को जन्म देने में सक्षम है।
उल्लेखनीय है कि ओजोन की परत समतापमंडल में पायी जाती है। यह परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर इसके दुष्प्रभाव से पृथ्वी को बचाती है। समतापमंडल, क्षोभमंडल के ऊपर स्थित होता है। पृथ्वी के ऊपर 17 से 50 किमी की ऊँचाई के बीच समतापमंडल की उपस्थिति होती है।