केन्द्र सरकार के द्वारा ?वस्तु एवं सेवा कर? (GST) के तहत राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गयी

16 नवम्बर, 2017 को प्रधनमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की बैठक में ‘वस्तु एवं सेवा कर’ के तहत ‘राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण’ के गठन को स्वीकृति प्रदान की दी गई। ज्ञातव्य है कि ‘राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण’ की स्थापना इसलिए की जा रही है ताकि ‘वस्तु एवं सेवा कर’ के क्रियान्वयन से वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में जो कमी आयेगी उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा सके।

  • ‘वस्तु एवं सेवा कर’ कानून में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर मुनाफारोधी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत ढाँचे का निर्माण किया जायेगा ताकि वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट तथा जीएसटी की घटी हुई दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा सके।
  • इस संस्थागत ढाँचे के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण’ के अतिरिक्त एक स्थायी समिति, प्रत्येक राज्य में जाँच समितियों तथा ‘सीबीईसी’ (CBEC) के सेफगार्ड्स महानिदेशालय आदि को शामिल किया जायेगा।

राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण’ (National Antiprofiteering Authority) की क्रियाविधि :

  • वे उपभोक्ता जो यह मानते हैं कि उन्हें ‘जीएसटी’ के लागू होने से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद पर घटी हुई कीमतों का लाभ नहीं प्राप्त हो रहा है तो वे अपने राज्य की जाँच समिति में आवेदन कर सकेंगे।यदि उपभोक्ताओं को ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर बृहद रूप से उपयोग की जाने वाली वस्तु एवं सेवा के मूल्य में कमी का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो वे सीधे स्थायी समिति के समक्ष आवेदन कर सकेंगे।
  • यदि स्थायी समिति को प्राथमिक दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित शिकायत में मुनाफाखोरी शामिल है तो वह इस मामले को सीधे ‘केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड’ (CBEC) के सेफगार्ड्स महानिदेशालय को भेज सकेगी।
  • यदि इन सब के पश्चात् ‘राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण’ यह पाता है कि उपभोक्ताओं को लाभ मिलना चाहिए तो वह उत्पादक एवं आपूर्तिकर्त्ता को आदेश दे सकेगा कि वह उपभोक्ताओं को घटी हुई कीमतों की भरपाई करे।
  • यदि गैर-कानूनी तरीके से अर्जित किये गये लाभ को उपभोक्ता तक नहीं पहुँचाया जा सकता तो संबंधित मुनाफाखोर, उत्पादक एवं आपूर्तिकर्त्ता को जुर्माने की रकम ‘उपभोक्ता कल्याण निधि’ में जमा करानी होगी।
  • इस प्रकार ‘राष्ट्रीय मुनापफारोधी प्राधिकरण’ मुनाफाखोरी को नियंत्रित कर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने में मददगार साबित होगा।
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